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जातिगत जनगणना को लेकर सीएम नीतीश सहित 11 नेताओं ने की पीएम मोदी से मुलाकात, 40 मिनट से ज्यादा चली बैठक

देश के कई राज्यों में जातिगत जनणना की मांग उठने लगी है। इसी बीच बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित 10 दलों के 11 नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। दिल्ली में जारी यह बाठक करीब 40 मिनट से ज्यादा चली। बैठक के बाद नीतीश कुमार ने बताया कि हमने जातीय जनगणना पर अपनी बात रखी और पीएम मोदी ने हमारी बात सुनी।

By Amit ranjan 
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नई दिल्ली : देश के कई राज्यों में जातिगत जनणना की मांग उठने लगी है। इसी बीच बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित 10 दलों के 11 नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। दिल्ली में जारी यह बाठक करीब 40 मिनट से ज्यादा चली। बैठक के बाद नीतीश कुमार ने बताया कि हमने जातीय जनगणना पर अपनी बात रखी और पीएम मोदी ने हमारी बात सुनी।

बैठक के बाद बोले नीतीश

बैठक के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार की सभी राजनीतिक पार्टियों का जातिगत जनगणना को लेकर एक मत है। हम सभी ने प्रधानमंत्री से इसकी मांग की है। अभी 10 पार्टी के 11 लोग गए थे। पूरे विस्तार में पीएम मोदी को बताया और पीएम ने हम लोगो की बात गौर से सुनी। उन्होंने कहा, ‘हम लोगों ने हर तरह की बात रखी है। एक बार जनगणना हो जाएगा तो उचित निर्णय लिया जा सकेगा। ये सारी बात उनके सामने रखी है।’

आंकड़े आने के बाद लागू होंगी कल्याणकारी योजनाएं

राजद नेता तेजस्वी यादव भी पीएम मोदी से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे। उन्होंने कहा कि ‘राष्ट्र हित में पूरे बिहार के दस पार्टी के लोग मिल कर आए हैं। ये ऐतिहासिक काम होगा। मंडल कमीशन के बाद पता चला कि हजारों जातियां देश में मौजूद हैं। जब पेड़ और जानवरों की गिनती होती है तो जातीय जनगणना क्यों नहीं हो?’ उन्होंने कहा कि जातियों को ओबीसी में शामिल करने का हक राज्य सरकारों को दे दिया गया है, लेकिन इससे कोई फायदा नहीं होगा। क्योंकि, हमारे पास कोई आंकड़े ही नहीं हैं। एक बार आंकड़े सामने आ जाएंगे तो सरकारें उसके हिसाब से कल्याणकारी योजनाओं को भी लागू कर पाएंगी।

समाज में दूर होगा द्वेष

कांग्रेस विधायक दल के नेता अजीत शर्मा ने कहा कि जाति आधारित जनगणना महत्वपूर्ण है। यह आरक्षण को पारदर्शी बनाएगी, जिससे समाज में द्वेष दूर होगा। क्रीमी लेयर और नॉन क्रीमी लेयर के लोगों का भी पता चल सकेगा। वहीं, सीपीआईएम के अजय कुमार ने कहा कि जातीय आधार पर शोषण से मुक्ति के लिए जातिगत जनगणना जरूरी है।

पीएम मोदी से इन 11 नेताओं ने की मुलाकात

1) जेडीयू : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और बिहार के संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी

2) आरजेडी : नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव

3) कांग्रेस: विधायक अजित शर्मा

4) भाकपा माले: महबूब आलम

5) एआईएमआईएम: अख्तरुल इमाम

6) हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा: पूर्व सीएम जीतन राम मांझी

7) वीआईपी: मुकेश साहनी

8) सीपीआई: सूर्यकांत पासवान

9) सीपीएम: अजय कुमार

10) बीजेपी: जनक राम

बिहार में दो बार पास हो चुका है प्रस्ताव

बिहार विधानसभा में दो बार जातीय जनगणना का प्रस्ताव पारित हो चुका है। देश में आखिरी जातीय जनगणना 1931 में हुई। इससे पहले 10-10 साल में जातीय जनगणना होती रही है। 2011 में भी जाति आधारित जनगणना कराई गई थी, लेकिन सरकार ने इसके आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए थे।

इन नेताओं ने की प्रधानमंत्री से मुलाकात

नीतीश कुमार (मुख्यमंत्री), नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी, शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी, खनन एवं भूतत्व मंत्री (भाजपा नेता) जनक राम, पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री मुकेश सहनी, कांग्रेस विधायक दल के नेता अजीत शर्मा, सीपीआई विधायक सूर्यकांत पासवान, सीपीएम विधायक अजय कुमार, भाकपा माले विधायक महबूब आलम, एआईएमआईएम विधायक अख्तरूल इमान ।

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