रिपोर्ट: सत्यम दुबे
नई दिल्ली: भारत के पूर्व दिग्गज खिलाड़ी युवराज सिंह की मुश्किल बढ़ती हुई दिख रही है। एक ओर जहां अपने करियर को लेकर जूझ रहें हैं, तो दूसरी ओर युवराज सिंह पर आरोप लगाया गया है कि पिछले साल युवराज सिंह ने दलित समाज के लिए अभद्र टिप्पणी की थी। दरअसल, बीते साल 1 जून को युवराज सिंह एक लाइव चैट के दौरान अपने साथी क्रिकेटर रोहित शर्मा के साथ वीडियो कॉलिंग पर क्रिकेटर युजवेंद्र चहल को लेकर अभद्र व अपमानजनक शब्द का इस्तेमाल किया था। जिसके बाद वीडियो वायरल हो गया था। मचे बवाल के बीच युवराज को माफी भी मांगनी पड़ी थी।
जिसके बाद 2 जून को रजत कलसन ने युवराज सिंह के खिलाफ हांसी पुलिस को एक शिकायत दी थी, जिसमें उन्होंने मुकदमा दर्ज कर युवराज सिंह को गिरफ्तार करने की मांग की थी। नेशनल अलायंस और दलित ह्यूमन राइट्स के संयोजक रजत कलसन ने बीते 11 जनवरी को अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि बीते वर्ष 2 जून को उन्होंने युवराज सिंह के खिलाफ हांसी पुलिस को एक शिकायत दी थी। जिसमें युवराज सिंह की गिरफ्तारी की मांग की गई थी।
शुक्रवार को हरियाणा पुलिस की तरफ से हिसार स्थित विशेष अदालत में दायर स्टेट्स रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी गई कि यह मामला हरियाणा पुलिस ने चंडीगढ़ पुलिस को सौंप दी है। जिसके बाद अदालत ने आगे की स्थति जानने के लिए 4 अप्रैल को स्थिति रिपोर्ट दायर करने के आदेश दिए हैं।
आपको बता दें कि हिसार स्थित एससी/एसटी एक्ट की विशेष अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वेदपाल सिरोही के समक्ष स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करते हुए हरियाणा पुलिस ने बताया कि उनकी ओर से की गई प्रांरभिक जांच में सामने आया है कि यह मामला चंडीगढ़ का है, लिहाजा हमने शिकायत को चंडीगढ़ पुलिस को भेज दिया है। इस मामले की जांच चंडीगढ़ पुलिस करेगी। रिपोर्ट में बताया गया कि कुछ दिन पहले ही उसकी तरफ से यह रिपोर्ट चंडीगढ़ पुलिस को भेजी गई है।
इससे पहले पिछली सुनवाई को हिसार स्थित एससी/एसटी एक्ट की विशेष अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वेदपाल सिरोही ने शिकायतकर्ता एवं वकील रजत कलसन की याचिका पर मामले के जांच अधिकारी डीएसपी विनोद शंकर व मामले में जांच अधिकारी रहे व वर्तमान में बरवाला के पुलिस उपाधीक्षक रोहतास सिहाग एवं हांसी शहर थाना के तत्कालीन प्रभारी जसवीर सिंह के खिलाफ अनुसूचित जाति व जनजाति अत्याचार अधिनियम की धारा 4 के तहत जांच करने के आदेश दिए थे।
अब जानते हैं, क्या है एसी-एसटी प्रावधान
एससी/एसटी एक्ट की इस धारा के तहत किसी लोकसेवक जो अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं है, उसके द्वारा अपने कर्तव्यों की अनदेखी किए जाने पर 6 महीने से लेकर एक साल तक की सजा का प्रावधान है।