पितृ पक्ष में यमराज पूर्वजों को अपने परिजनों से मिलने के लिए मुक्त कर देते हैं, इसलिए श्राद्ध व तर्पण विधि करके उनके प्रसन्न किया जाता है, जिससे उनकी आत्मा को शांति मिल सके। पितरों को देवताओं की तरह ही समर्थवान माना गया है।
पितृ पक्ष में तिल का विशेष महत्व है। तिल भगवान विष्णु के पसीने से उत्पन्न हुआ है इसलिए यह सबसे पवित्र माना जाता है। इनसे श्राद्ध करने पर पितरों की आत्मा को संतुष्टि मिलती है।
श्राद्ध में अक्षत जरूर चढ़ाना चाहिए। यह पितरों के लिए सबसे पहला भोज माना जाता है। अक्षत मिलाकर ही पिंड तैयार किया जाता है। चावल के बने पिंड से पितर लंबे समय तक संतुष्ट रहते हैं।
श्राद्ध में कुश भी जरूरी है। कुश का अर्थ घास होता है। हिन्दू पूजा-पाठ में कुश को पवित्र मानकर प्रयोग किया जाता है।
पितरों को उनकी संतान द्वारा दिए गए जल से ही संतुष्टि मिलती है। जल ही जन्म से लेकर मोक्ष तक साथ देता है। तर्पण विधि से पितर जल्द प्रसन्न होते हैं, जिससे घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती है।