Home भाग्यफल रविवार को इस तरह से करें सूर्य देव की पूजा-अर्चना, मिलेंगे चमत्कारिक लाभ

रविवार को इस तरह से करें सूर्य देव की पूजा-अर्चना, मिलेंगे चमत्कारिक लाभ

2 second read
0
286

रिपोर्ट – पल्लवी त्रिपाठी

रविवार का दिन भगवान सूर्य को समर्पित है। इस दिन भगवान सूर्य की आराधना करने पर जल्द ही मनोकामना पूरी होती है । माना जाता है कि जो भक्त रविवार के दिन पूरे भक्ति भाव से सूर्य देव का पूजन करता हैं, उससे सूर्यदेव प्रसन्न होकर प्रत्यक्ष दर्शन देते हैं । साथ ही सूर्यदेव अपने भक्तों को आरोग्य का आशीर्वाद भी देते हैं।

सूर्य देव की पूजा करने की विधि है । इस विधि से पूजा करने पर जल्द ही चमत्कारी लाभ मिलते हैं । सनातन परंपरा के अनुसार, प्रत्यक्ष देवता सूर्य की साधना-उपासना शीघ्र ही फल देने वाली मानी गयी है। सूर्यदेव की पूजा के लिए सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं । जिसके बाद उगते हुए सूर्य का दर्शन करें । इस दौरान सूर्यदेव के इस मंत्र ॐ घृणि सूर्याय नम: का उच्चारण करें और सूर्यदेव को जल अर्पित करें। सूर्य को दिए जाने वाले जल में लाल रोली, लाल फूल अवश्य मिलाएं । यह उनके प्रिय चीजों में से एक हैं । सूर्य को अर्घ्य देने के बाद लाल आसन पर पूर्व दिशा में बैठकर सूर्य के मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें ।

बता दें कि कई लोगों का मानना है कि सूर्यदेव की पूजा केवल सुबह की जाती है । जबकि ऐसा नहीं है सूर्यदेव की पूजा न सिर्फ उदय होते हुए बल्कि अस्त होते समय भी की जाती है। सूर्यदेव की डूबते हुए साधना सूर्य षष्ठी के पर्व पर की जाती है, जिसे छठ पूजा के तौर पर जाना जाता हैं। मान्यता है कि इस दिन सूर्य देवता को अघ्र्य देने से इस जन्म के साथ-साथ, किसी भी जन्म में किए गए पाप नष्ट हो जाते हैं। अस्त हो रहे सूर्य को पूजन करने के पीछे ध्येय यह भी होता है कि — ‘हे सूर्य देव, आज शाम हम आपको आमंत्रित करते हैं कि कल प्रातःकाल का पूजन आप स्वीकार करें और हमारी मनोकामनाएं पूरी करें।

जीवन में सुख-समृद्धि और सफलता के लिए जातकों को सूर्यदेव के इन मंत्रों का जाप करना चाहिए । इन मंत्रों का जाप करने से आपको न केवल सुख-समृद्धि की प्राप्ति होगी, बल्कि आरोग्य भी प्राप्त होता है । यानी आपको रोगों से मुक्ति मिलेगी ।

1. एहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते।
अनुकम्पय मां भक्त्या गृहणाध्र्य दिवाकर।।
2. ॐ घृणि सूर्याय नमः।।
3. ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पतेए अनुकंपयेमां भक्त्याए गृहाणार्घय दिवाकररू।।
4. ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ।।

Load More In भाग्यफल
Comments are closed.