हमारे हिन्दू धर्म ग्रंथो में माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी को बसंत पंचमी के नाम से जाना जाता है, इस दिन माता सरस्वती की पूजा होती है और इस दिन को पंचांग में भी अबूझ मुहूर्त के नाम से जाना जाता है और मान्यता है कि इस दिन को कोई भी काम अगर आप शुरू करते है तो उसमें आपको सफलता मिलती है तो आज इस लेख में हम इस त्यौहार की मान्यताएं और सरस्वती पूजन क्यों किया जाता है, यह बताने वाले है।

दरअसल यह शब्द ऋतुओं के राजा बसंत के आगमन का सूचक है और उसी के नाम पर इसे बसंत और शुक्ल पक्ष की पंचमी के नाम पर इसे बसंत पंचमी बोला गया, बाग़-बगीचों में खिलते रंग-बिरंगे पुष्पों पर मंडराते भंवरे और पक्षियों का मधुर कलरव अगर हो तो समझ जाइये की बसंत ऋतु बस आ गयी है।
सिर्फ इतना ही नही स्वयं कवि कालिदास ने भी इसे ”सर्वप्रिये चारुतर वसंते” कहकर अलंकृत किया है। गीता में भगवान श्री कृष्ण ने ”ऋतूनां कुसुमाकराः” अर्थात मैं ऋतुओं में वसंत हूँ कहकर वसंत को अपना स्वरुप बताया है।
वसंत पंचमी के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करना भी शुभ होता है। इतना ही नहीं, इस दिन पीले पकवान बनाना भी काफी अच्छा माना जाता है।

बसंत पंचमी मनाने के पीछे और एक कारण है और वो है माता सरस्वती का जन्म, इसके पीछे एक पौराणिक कथा है, दरअसल भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई।
उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। तभी ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती नाम दिया। वह दिन वसंत पंचमी का था। इसी वजह से हर साल वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती का जन्मदिन मनाया जाने लगा और उनकी पूजा की जाने लगी।

बहुत कम लोगों को शायद यह पता है कि बसंत पंचमी के दिन कामदेव और रति की पूजा की जाती है, दरअसल वसंत पंचमी को मदनोत्सव भी कहा जाता है, सृष्टि का जो आधार है वो स्त्री और पुरुष के बीच का आकर्षण है और उसके लिए ह्रदय में प्रेम का संचार करने का कार्य कामदेव और उनकी पत्नी रति को है।
मान्यता है कि इसी दिन पहली बार कामदेव और उनकी पत्नी ने मनुष्य के ह्रदय में प्रेम का संचार किया था, और इसी दिन उनकी पूजा की जाती है और माना जाता है कि ऐसा करने से जीवन में पारिवारिक प्रेम, स्नेह, प्रसन्नता आदि में वृद्धि होती है।

हमारे हिन्दू धर्म में मान्यता है कि माता सरस्वती ज्ञान की कारक है और शिशु के ह्रदय में ज्ञान का संचार माता सरस्वती करती है। इस दिन को छोटे बच्चों के लिए अक्षर ज्ञान करवाने के लिए सबसे शुभ माना जाता है। इस दिन स्कूलों एवं शिक्षा संकायों में सरस्वती पूजन किया जाता है तथा ज्ञान वृद्धि के लिए कामना की जाती है।
इसी के साथ भगवान गणेश ,सूर्यदेव ,भगवान विष्णु व शिव-पार्वती की भी पूजा अर्चना करने का नियम है, वसंत पंचमी के दिन माता के चरणों पर गुलाल भी अर्पित करने का विधान है और बच्चे ”ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः ” का जाप करके माता सरस्वती से ज्ञान की कामना करते है।