1. हिन्दी समाचार
  2. एस्ट्रोलोजी
  3. क्यों मनाई जाती है बसंत पंचमी ? इस दिन सरस्वती की पूजा क्यों ?

क्यों मनाई जाती है बसंत पंचमी ? इस दिन सरस्वती की पूजा क्यों ?

By: RNI Hindi Desk 
Updated:
क्यों मनाई जाती है बसंत पंचमी ? इस दिन सरस्वती की पूजा क्यों ?

हमारे हिन्दू धर्म ग्रंथो में माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी को बसंत पंचमी के नाम से जाना जाता है, इस दिन माता सरस्वती की पूजा होती है और इस दिन को पंचांग में भी अबूझ मुहूर्त के नाम से जाना जाता है और मान्यता है कि इस दिन को कोई भी काम अगर आप शुरू करते है तो उसमें आपको सफलता मिलती है तो आज इस लेख में हम इस त्यौहार की मान्यताएं और सरस्वती पूजन क्यों किया जाता है, यह बताने वाले है।

बसंत पंचमी क्यों मनाई जाती है ?

why-is-goddess-saraswati-worshipped-on-basant-panchami-2020-history-of-the-vasant-panchami

दरअसल यह शब्द ऋतुओं के राजा बसंत के आगमन का सूचक है और उसी के नाम पर इसे बसंत और शुक्ल पक्ष की पंचमी के नाम पर इसे बसंत पंचमी बोला गया, बाग़-बगीचों में खिलते रंग-बिरंगे पुष्पों पर मंडराते भंवरे और पक्षियों का मधुर कलरव अगर हो तो समझ जाइये की बसंत ऋतु बस आ गयी है।

सिर्फ इतना ही नही स्वयं कवि कालिदास ने भी इसे ”सर्वप्रिये चारुतर वसंते” कहकर अलंकृत किया है। गीता में भगवान श्री कृष्ण ने ”ऋतूनां कुसुमाकराः” अर्थात मैं ऋतुओं में वसंत हूँ कहकर वसंत को अपना स्वरुप बताया है।

वसंत पंचमी के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करना भी शुभ होता है। इतना ही नहीं, इस दिन पीले पकवान बनाना भी काफी अच्छा माना जाता है।

इस दिन सरस्वती की पूजा क्यों ?

why-is-goddess-saraswati-worshipped-on-basant-panchami-2020-history-of-the-vasant-panchami

बसंत पंचमी मनाने के पीछे और एक कारण है और वो है माता सरस्वती का जन्म, इसके पीछे एक पौराणिक कथा है, दरअसल भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई।

उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। तभी ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती नाम दिया। वह दिन वसंत पंचमी का था। इसी वजह से हर साल वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती का जन्मदिन मनाया जाने लगा और उनकी पूजा की जाने लगी।

इस दिन कामदेव और रति की पूजा क्यों ?

why-is-goddess-saraswati-worshipped-on-basant-panchami-2020-history-of-the-vasant-panchami

बहुत कम लोगों को शायद यह पता है कि बसंत पंचमी के दिन कामदेव और रति की पूजा की जाती है, दरअसल वसंत पंचमी को मदनोत्सव भी कहा जाता है, सृष्टि का जो आधार है वो स्त्री और पुरुष के बीच का आकर्षण है और उसके लिए ह्रदय में प्रेम का संचार करने का कार्य कामदेव और उनकी पत्नी रति को है।

मान्यता है कि इसी दिन पहली बार कामदेव और उनकी पत्नी ने मनुष्य के ह्रदय में प्रेम का संचार किया था, और इसी दिन उनकी पूजा की जाती है और माना जाता है कि ऐसा करने से जीवन में पारिवारिक प्रेम, स्नेह, प्रसन्नता आदि में वृद्धि होती है।

बच्चों के अक्षर ज्ञान का दिन है बसंत पंचमी –  

why-is-goddess-saraswati-worshipped-on-basant-panchami-2020-history-of-the-vasant-panchami

हमारे हिन्दू धर्म में मान्यता है कि माता सरस्वती ज्ञान की कारक है और शिशु के ह्रदय में ज्ञान का संचार माता सरस्वती करती है। इस दिन को छोटे बच्चों के लिए अक्षर ज्ञान करवाने के लिए सबसे शुभ माना जाता है। इस दिन स्कूलों एवं शिक्षा संकायों में सरस्वती पूजन किया जाता है तथा ज्ञान वृद्धि के लिए कामना की जाती है।

इसी के साथ भगवान गणेश ,सूर्यदेव ,भगवान विष्णु व शिव-पार्वती की भी पूजा अर्चना करने का नियम है, वसंत पंचमी के दिन माता के चरणों पर गुलाल भी अर्पित करने का विधान है और बच्चे ”ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः ” का जाप करके माता सरस्वती से ज्ञान की कामना करते है।

Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...