हिंदू धर्म में प्रथम पूज्य देव गणेश जी को माना गया है। गणेश जी बुद्धि के देव है और विघ्नहर्ता भी कहे जाते है।
वैसे तो गणेश जी की पूजा में कई चीज़े इस्तेमाल होती है लेकिन दूर्वा अनिवार्य है। उनकी पूजा बिना दूर्वा संपन्न नहीं होती है।
दरअसल इसके पीछे एक असुर की कथा है। प्राचीन काल में अनलासुर नाम का एक दैत्य था। उसके कोप से स्वर्ग और धरती पर हाहाकार मचा था।
अनलासुर ऋषि-मुनियों और आम लोगों को जिंदा निगल जाता था। दैत्य से त्रस्त होकर देवराज इंद्र सहित सभी देवी-देवता और प्रमुख ऋषि-मुनि महादेव से प्रार्थना करने पहुंचे।
तब शंकर जी बोले की उसका अंत तो गणेश जी करेंगे। उसके बाद उन्होंने उस असुर से युद्ध करके उसे निगल लिया।
इसकी वजह से उनके पेट में बहुत जलन होने लगी। जब उनकी जलन शांत नहीं हुई तो कश्यप ऋषि ने 21 दूर्वा की गाँठ बनाकर उन्हें खाने को दी तब जाकर उनकी जलन शांत हुई।
इसके बाद से ही 21 दूर्वा रोज़ भगवान गणेश जी को चढ़ाने का विधान शुरू हुआ।