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अहिरावण ने क्यों किया था राम लक्ष्मण का अपहरण ! कैसे हुई उसकी मृत्यु

By: RNI Hindi Desk 
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अहिरावण ने क्यों किया था राम लक्ष्मण का अपहरण ! कैसे हुई उसकी मृत्यु

हमारी पौराणिक कथाओं में एक से एक बलशाली असुरों का जिक्र है और ऐसा ही एक असुर था अहिरावण, जो की रावण का मित्र था। जब राम और रावण की सेनाएं आमने सामने युद्ध के मैदान में थी तो रावण ने एक दिन अपने मित्र से मदद मांगी।

अहिरावण पाताल लोक में रहता था। वो एक दिन राम के वेश में शिविर में गया और दोनों भाइयों यानी राम और लक्ष्मण को नींद में सोते हुए ही उठा ले आया। जब सुबह दोनों नहीं मिले तो सेना में हो हल्ला मच गया।

विभीषण समझ गए ये रावण ने पक्का किसी से करवाया है। हनुमान जी बलशाली थे और राम के भक्त भी। उनको विभीषण ने अहिरावण के बारे में बताया, और आशंका जताई की कहीं ये उसका काम तो नहीं ? बस इतना सुनते ही हनुमान जी महाराज पाताल लोक पहुंचे।

वहां उन्होनें अहिरावण को देवी की पूजा करते हुए देखा, उस वक़्त पांच दिशाओं में दीपक जले हुए थे और राम-लक्ष्मण मूर्छित पड़े थे। अहिरावण के द्वारपाल मकरध्वज से उन्हें ज्ञात हुआ की इन दीपकों को एक साथ बुझाना होगा। अगर अहिरावण का ये अनुष्ठान सफल हुआ तो बड़ी समस्या हो जायेगी।

कोई और उपाय ना मिलता देख, हनुमान जी ने पंचमुखी रूप धारण किया। उत्तर दिशा में वराह मुख, दक्षिण दिशा में नरसिंह मुख, पश्चिम में गरूड़ मुख, आकाश की ओर हयग्रीव मुख एवं पूर्व दिशा में हनुमान मुख।

यह रूप अति उग्र रूप था। नरसिंह और वराह ये दो अवतार असुरों का अंत करने के लिए ही हुए थे तो ऐसे में अंदाज़ा लगाइये की अहिरावण कितना शक्तिशाली होगा ! आखिर पांचों दीपक एक साथ बुझा दिए गए और अहिरावण से युद्ध हुआ।

हनुमान जी के हाथों अहिरावण का अंत हुआ और राम लक्ष्मण जी मुक्त हुए, जाते जाते उन्होनें मकर ध्वज को पाताल लोक का राजा बना दिया।

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