रामायण में बाली की बड़ी महिमा गायी गयी है। उसे भगवान राम को भी छिपकर मारना पड़ा था क्यूंकि बाली को अपने पिता इंद्र से एक ऐसा मणियों का हार मिला था जिसे पहनने के बाद जो भी उसके सामने युद्ध करने आता उसकी शक्ति आधी रह जाती थी।
लेकिन आज इस लेख में हम इन सब बातों की नहीं बल्कि उनकी पत्नी तारा की बात करते है, दरअसल बाली की पत्नी तारा का जन्म और उनसे बाली के विवाह की कथा बेहद रोचक है।
दरअसल एक काल में भगवान् विष्णु के कहने पर जब देवताओं और असुरों ने समुद्र मंथन किया था तो उसमें से कुछ अप्सरा भी निकली थीं, और आपको शायद ज्ञात नहीं होगा की उनमे से एक तारा भी थी और उस तारा को देखकर बाली और सुषेण दोनों काम पीड़ित हो गए।
अब एक ही स्त्री पर दो व्यक्ति मोहित हो गए थे तो कैसे ये निर्णय होता की वो किसके साथ जायेगी ? ऐसे में यह समस्या भगवान विष्णु के पास जा पहुंची।
तमाम चर्चा के बाद भगवान ने ये निर्णय दिया कि, कन्या के दाएँ ओर पति और बाएँ ओर पिता होता है। ऐसे में बाली दायें और थे और सुषेण बायीं और, इस प्रकार सुषेण तारा के पिता बने और बाली तारा के पति बन गए और उसे ब्याह कर ले गए।