इस संसार में किसे स्वर्ग की कामना नहीं होती है ? हर व्यक्ति यह चाहता है कि उसे स्वर्ग मिले और उसका कारण है स्वर्ग का दिव्य होना लेकिन आचार्य चाणक्य का कहना है कि ऐसे भी कुछ लोग होते है जिन्हे जीते जी पृथ्वी पर स्वर्ग मिल जाता है।
वो लिखते है कि यस्य पुत्रो वशीभूतो भार्या छन्दानुगामिनी । विभवे यश्च सन्तुष्टस्तस्य स्वर्ग इहैव हि।।
इसका अर्थ यह है कि एक ऐसा व्यक्ति संतान आज्ञाकारी है, गलत काम नहीं करती है और माता-पिता का सम्मान करती है। ऐसा व्यक्ति जीते जी स्वर्ग का अनुभव करता है।
इसके बाद वो कहते है कि कोई ऐसा व्यक्ति हो जिसकी पत्नी उसकी हर बात का अनुसरण करे। उसकी बात माने तो उसे भी यही स्वर्ग का अनुभव हो जाएगा।
इसके बाद जो लालची नहीं है। जिसे अपने धन पर संतोष है। अगर इंसान संतोषी होगा तो राग द्वेष लालच जीवन में नहीं आएंगे। ऐसा व्यक्ति भी इसी संसार में स्वर्ग भोग लेता है।
बता दे, चाणक्य ने भारत को एक करके चंद्रगुप्त मौर्य को सम्राट बनाया था और वे तक्षशिला विश्वविद्यालय में अर्थ शास्त्र के आचार्य थे।