वैदिक ज्योतिष के ग्रंथो यथा उत्तर कालमृत, फलदीपिका, सारावली जैसे ग्रंथों में कई योगों का जिक्र है, और ये योग कई प्रकार के होते है। कई योग ऐसे होते है जो फलित होने पर मनुष्य को लाभ देते है वही कई योग ऐसे भी है जिनके कारण मनुष्य को भारी निर्धनता झेलनी पड़ जाती है और ऐसा ही एक योग है केमद्रुम योग।
केमद्रुम योग वाले जातक के लिए कहा जाता है कि उसे जीवन में एक बार तो कम से कम निर्धनता देखनी होती है। तो आज हम आपको बताते है कि यह योंग कैसे बनता है।
जब जातक की कुंडली में चंद्रमा अकेला हो और उसके अगल-बगल अन्य भावों में कोई ग्रह न हो तो इस स्थिति में केमद्रुम योग बनता है। लेकिन इसी स्थिति में जब चंद्रमा पर किसी शुभ ग्रह की दृष्टि न पड़ रही हो और वह स्वयं नीच का हो, पापी व क्रूर ग्रह उसे देख रहे हों तो यह बहुत ही अशुभ फल देने वाला योग बन जाता है।
इसके पीछे का कारण यह है कि चन्द्रमा जातक के मन का कारक है, किसी भी व्यक्ति के मन की ताक़त उसके चन्द्रमा से देखी जाती है वही जब पाप पीड़ित हो जाता है तो व्यक्ति बहुत कंफ्यूज हो जाता है और कोई निर्णय नहीं ले पाता है और ऐसी परिस्तिथि में जातक निर्धन होगा ही।
हालांकि यहां यह ध्यान देना बहुत ज़रूरी है की अगर कोई शुभ ग्रह चन्द्रमा से केंद्र में हो या चन्द्रमा नीच भंग राजयोग बना रहा हो तो इसका प्रभाव कम हो जाता है। उदाहरण के लिए अगर जातक कि कुंडली में केमुद्रम योग हो लेकिन गुरु चन्द्रमा के केंद्र में होने से अगर गजकेसरी योग बन रहा हो तो यह योग भंग हो जाएगा और इसकी अशुभता में कमी आ जाएगी।
लेकिन इसके बाद भी अगर आपकी कुंडली में कोई दोष है या आप परेशान है तो किसी योग्य ज्योतिषी को अपनी कुंडली दिखाए और उपाय करे।