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वास्तु टिप्स: आपके भवन में सूर्य का स्थान और मुखिया की सेहत

By: RNI Hindi Desk 
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वास्तु टिप्स: आपके भवन में सूर्य का स्थान और मुखिया की सेहत

किसी भी भवन में रहने वाले लोगों को वहां की ऊर्जा हमेशा प्रभावित करती है। फिजिक्स का एक व्यापक सिद्धांत है की ऊर्जा ना ही उत्पन्न की जा सकती है और ना ही उसे नष्ट किया जा सकता है, ऊर्जा सिर्फ एक फॉर्म से दूसरे फॉर्म में ट्रांसफर होती है। आप लाइट को पकड़ नहीं सकते और ना ही आपको पता है की ये लाइट रहती किधर है ?

आपको सिर्फ यह पता है की स्विच ऑन करते ही बल्ब चालु हो जाता है, आप सिर्फ एक्शन परफॉर्म कर सकते है, इससे ज्यादा आप कुछ नहीं कर सकते, ऊर्जा का एक स्त्रोत होता है वही से वो संचालित होती है। अगर फ्यूज ख़राब हो जाए तो कितना ही स्विच ऑन करिये बल्ब नहीं जल सकता ठीक उसी प्रकार ग्रहों की ऊर्जाओं के सिद्धांत है।

जैसे हर ग्रह का कुंडली के एक भाव में स्थान होता है ठीक उसी प्रकार हर ग्रह का दिशाओं पर अधिकार होता है और उस दिशा पर उसकी ऊर्जा का प्रभाव पड़ता है। सूर्य ग्रहों का राजा है और यह भवन में घर के मुखिया को दर्शाता है और दिशा इसकी पूर्व है।

आप हमेशा ध्यान रखिये की आपके घर की पूर्व दिशा थोड़ी सी खुली रहे, इस दिशा में आपको कभी भी भारी और बेकार वस्तुएँ नहीं रखनी चाहिए। सूर्य तेजस्वी ग्रह है और यह सब ग्रहों में सबसे बलवान ग्रह है। अगर आपके घर की पूर्व दिशा दोषमुक्त रहेगी तो उसके स्वामी को समाज में खूब सम्मान प्राप्त होगा वही उसकी सेहत भी अच्छी रहेगी।

सूर्य की रश्मियां कोशिश करिये की आपके भवन की पूर्व दिशा पर पड़ती रहे और ईशान कोण में पूजा घर हो। जैसे ही सुबह की किरणे उस दिशा में आये उसी दौरान ईशान में बैठकर मंत्रों का जाप करें। अगर आप आदित्य ह्रदय स्तोत्र का पाठ इसी नियम से करते है तो जीवन में कभी निराशा आपको छू भी नहीं सकती ये वास्तु का प्रामाणिक नियम है।

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