मनुष्य के जीवन में दिशाओं और उनसे प्रवाहित होने वाली ऊर्जाओं का बड़ा असर होता है। यही कारण है कि पूरा वास्तु का सिद्धांत ऊर्जा पर आधारित है।
हर दिशा की अपनी एक ऊर्जा होती है जो उस दिशा में रहने वालों की ऊर्जा को इफ़ेक्ट करती है। इसलिए जब भी भवन का निर्माण किया जाता है उस समय वास्तु का पूरा ध्यान रखा जाता है।
घर में पूजा घर के भी कुछ नियम वास्तु में बताये गए है। आचार्यों का मत है कि पूजा घर सदैव पूर्व और उत्तर के बीच यानी ईशान कोण में होना चाहिए। इससे धन की आवक अच्छी बनी रहती है।
इस दिशा में कोई भी भारी सामान भी नहीं रखना चाहिए। पूजा घर में माना जाता है कि किसी भी मृत व्यक्ति या अपने पूर्वजों की तस्वीर को नहीं रखना चाहिए।
अगर आप अपने किसी पूर्वज की तस्वीर पूजा घर में रखते है तो उससे मंत्रों से उत्पन्न होने वाली ऊर्जा में कमी आती है। मृत लोगों की तस्वीर लगाने के लिए दक्षिण-पश्चिम दिशा बताई गयी है।
पूजाघर में हो सके तो अधिक देवताओं की मूर्ति ना रखे। सिर्फ अपने आराध्य की मूर्ति ही रखे। ऐसा करने से अभीष्ट मंत्र सिद्ध करने में आसानी होती है।