Home उत्तराखंड भारतीय किसान यूनियन रोड गुट और पुलिस के बीच हुई तीखी नोकझोंक, पुलिस ने दो जगह बैरीकेड्टस लगाकर किसानों को रोका

भारतीय किसान यूनियन रोड गुट और पुलिस के बीच हुई तीखी नोकझोंक, पुलिस ने दो जगह बैरीकेड्टस लगाकर किसानों को रोका

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हरिद्वार: भारतीय किसान यूनियन रोड गुट और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई। किसान दिल्ली जाने की जिद पर अड़े रहे। पुलिस ने दो जगह बैरीकेड्टस लगाकर किसानों को रोका। बाद में किसानों ने प्रशिक्षु आइएएस को ज्ञापन दिया और वापस लौट गए। किसानों ने स्थानीय समस्याओं को लेकर 21 जनवरी को सीएम आवास के घेराव का एलान किया।

भाकियू के प्रदेश अध्यक्ष पदम सिंह रोड के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान रविवार को प्रशासनिक भवन में एकत्र हुए। यहां पर किसानों ने नारेबाजी की। इस मौके पर प्रदेश अध्यक्ष पदम सिंह रोड ने कहा कि सरकार किसानों के गन्ने का भुगतान दिलाने में पूरी तरह से नाकाम साबित हुई है। अभी तक गन्ने का दाम तक घोषित नहीं किया गया है। इसकी वजह से किसानों में आक्रोश है।

15 दिन के बकाया पर ब्याज देने का प्रावधान है। इस पर भी कोई कार्रवाई नहीं। चकबंदी विभाग और ऊर्जा निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। सरकार को चाहिए कि वह किसानों को सस्ती दर पर बिजली, डीजल और कृषि उपकरण उपलब्ध कराए। इसके बाद किसानों ने नारेबाजी करते हुए दिल्ली जाने का एलान कर दिया।

इस पर पुलिस ने पहले तो किसानों को प्रशासनिक भवन पर रोकने की कोशिश की, लेकिन किसान यहां से निकलकर कांवड़ पटरी के रास्ते होते हुए जाने लगे। काफी देर तक हंगामा होता रहा। गणेशपुर पुल पर पुलिस ने बैरीकेडिंग और रस्से लगाकर रास्ता रोक दिया। आसपास के थानों से भी बड़ी संख्या में पुलिस बल और पीएसी आदि को तैनात कर दिया। इसको लेकर किसानों और पुलिस के बीच नोकझोंक भी हुई।

आखिरकार पुलिस किसानों को दिल्लर न जाने के लिए मनाने में कामयाब रही। बाद में किसानों ने प्रधानमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन प्रशिक्षु आइएएस नंदन कुमार को सौंपा। इस मौके पर प्रदेश उपाध्यक्ष फखरे आलम, जिलाध्यक्ष नाजिम अली, कुंवर संजीव कुशवाह, इंद्र सिंह रोड, मंजेश, प्रदीप त्यागी, महेन्द्र, अनीश अहमद, इरशाद प्रधान, मुबारिक, शमशाद प्रधान, इनाम, जावेद आदि मौजूद रहे।

बारिश में भी डटे रहे किसान 

कांवड़ पटरी के बंद होने की वजह से शहरवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। शहरवासियों को दूसरे रास्ते से होकर जाना पड़ा। इसकी वजह से उन्हें काफी दिक्कत हुई। वहीं बारिश के बीच भी किसान कांवड़ पटरी पर ही डटे रहे।

 

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