Home उत्तराखंड 2021 में होने वाले महाकुंभ में पहली बार देखने को मिलेगा कुछ नया, फेंके हुए सिक्कों को चुनने वाले वाले लोगों को दी जाएगी जीवनरक्षक की भूमिका

2021 में होने वाले महाकुंभ में पहली बार देखने को मिलेगा कुछ नया, फेंके हुए सिक्कों को चुनने वाले वाले लोगों को दी जाएगी जीवनरक्षक की भूमिका

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देहरादून: हरिद्वार में अगले साल 2021 में होने वाले महाकुंभ में पहली बार कुछ नया देखने को मिलेगा। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए महांकुभ मेला प्रशासन ने फैसला लिया है कि गंगा नदी में फेंके हुए सिक्कों को चुनने वाले वाले लोगों को जीवनरक्षक की भूमिका दी जाएगी। उल्लेखनीय है कि हरकी पैड़ी पर गंगा नदी में श्रद्धालुओं द्वारा फेंके हुए सिक्कों को यह लोग बहुत ही उम्दा तरीके से निकाल लेते हैं।

गंगा नदी से सिक्के चुनने वाले यह लोग नदी में फेंके हुए सिक्कों को नदी के तल से भी निकाल लाते हैं।  नदी में फेंके हुए सिक्कों को निकालने के लिए यह लोग गंगा नदी में डुबकी लगाने से लेकर, चुंबक, कांच के टुकड़े, प्लास्टिक के खाली डिब्बे, या फिर अपने पैरों का भी इस्तेमाल करते हैं। कुंभ मेलाधिकारी दीपक रावत बताते हैं कि गंगा नदी से सिक्के चुनने वाले लोगों की डाइविंग व तैराकी बेहतरीन होती है।

चूंकि, हरिद्वार में अगले साल होने वाले महाकुंभ में तीर्थ यात्रियों की भारी संख्या आने की उम्मीद है, इसके मद्देनजर इन्हें जीवनरक्षक की भूमिका देने पर विचार हो रहा है।  गोताखाेर की भूमिका में यह लोग किसी भी तीर्थ यात्री के गंगा नदी में डुबने या बहने पर इनकी भूमिका बहुत ही ज्यादा मददगार साबित हो सकती है।  बताया कि सिक्के चुनने वाले लोगों की गंगा नदी से सिक्के चुनकर ही आजीविका चलती है।

रावत ने बताया कि करीब 100 सिक्के चुनने वाले लोगों को महांकुंभ-2021 जीवनरक्षक की भूमिका देने पर विचार हो रहा है, और इसके लिए उन्हें मानदेय भी दिया जाएगा। सुनील पाल, जिनके सिर से पिता का साया बचपन में ही उठ गया था, वह गंगा नदी से सिक्कों को चुनने के साथ ही घाट पर फेंके हुए बर्तनों व कपड़ों से अपने परिवार का पालन करते हैं।

पाल बताते हैं कि हरिद्वार पुलिस ने उनसे बात की है कि वह कुंभ मेले के दौरान गोताखोर की भूमिका निभाकर नदी में बहने वाले लोगों की जान बचाएं। गंगा नदी से सिक्के चुनने वाले पवन मधुराज (34) कहते हैं कि वह 50 से 150 रुपये रोजाना नदी से सिक्के चुनकर कमा लेते हैं, जिससे उनका घर चलता है। सिक्कों के अलावा, बर्तन, नारियल और अंतिम संस्कार में इस्तेमाल होने वाले सामाग्री भी इक्ट्ठा करके कुछ पैसे कमा लेते हैं।

हर की पैड़ी में करीब 30 लोग ऐसे हैं जो गंगा नदी में फेंके हुए सिक्कों को चुनकर जीवनयापन करते हैं।  गंगा सभा के अध्यक्ष प्रदीप झा कहते हैं कि गंगा नदी से सिक्के चुनने वालो को गोताखोर की भूमिका देना एक सराहनीय कदम है। कहते हैं कि जल पुलिस के अलावा, गंगा सेवक दल के स्वयंसेवक भी गंगा के तटों में तैनात होते हैं, जो डुबते हुए तीर्थ यात्रियों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं।  अखाड़ा परिषद ने भी सिक्के चुनने वाले लोगों को गोताखोर की भूमिका देने के फैसले का स्वागत किया है।

 

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