आज ज्येष्ठा माह की पूर्णिमा है और इस दिन वट सावित्री व्रत करने का विधान है। वही आज चंद्र ग्रहण भी लगने वाला है। हालांकि यह पूर्ण चंद्र ग्रहण नहीं होगा।
वट सावित्री व्रत जहां ज्येष्ठ माह की अमावस्या के दिन मनाया जाता है, वहीं वट पूर्णिमा व्रत ज्येष्ठ माह की अमावस्या के दिन मनाया जाता है।
माना जाता है कि इस दिन सावित्री ने अपने पति के प्राण यमराज से वापस लेकर आईं थी इसलिए जितनी भी सुहागन महिलाएं है वो इस व्रत को करती है और अपने पति की लम्बी आयु का आशीर्वाद मांगती है।
पूर्णिमा तिथि आज शाम 3 बजे से शुरू होगी जो की 6 जून रात 10 बजे तक रहने वाली है। यह पर्व पश्चिम भारत के गुजरात और महाराष्ट्र राज्य में ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है जबकि उत्तर भारत में इसे ज्येष्ठ अमावस्या के दिन मनाते हैं।
इस दिन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करके तैयार होती है। 16 श्रृंगार करती है और वट वृक्ष की पूजा करती है। इस दिन भगवान सूर्य नारायण की पूजा करके उनसे पति की दीर्घायु की कामना की जाती है।
वही बात करे ग्रहण की तो चंद्र ग्रहण रात्रि 11 बजकर 16 मिनट से ग्रहण शुरू होकर 6 जून रात 2 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। रात 12 बजकर 54 मिनट पर यह अपनी पूर्ण स्थिति में होगा।