आषाढ़ माह में शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहा जाता है। हिन्दू मान्यता के अनुसार आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक भगवान् विष्णु का शयन काल माना जाता है।
वर्षा के इन चार माहों का संयुक्त नाम चातुर्मास दिया गया है। इसके दौरान जितने भी पर्व, व्रत, उपवास, साधना, आराधना करने का विधान है।
देवशयनी एकादशी से ही भगवान विष्णु क्षीरसागर में शयन करते हैं और अगले चार माह तक मांगलिक कार्यों पर पूर्ण विराम लग जाता है।
वैसे आपको बता दे कि इस साल चातुर्मास एक माह अधिक होने वाला है। 1 जुलाई से शुरू होकर यह समय 25 नवंबर तक होगा और उसके बाद ही नए और मांगलिक कार्य की शुरुआत होगी।
आपको बता दे देवशयनी एकादशी का व्रत करने से मनुष्य की सभी इच्छा पूर्ण होती है और वो सभी पापों से मुक्त हो जाता है।
इस दिन भगवान् विष्णु की पूजा करनी चाहिए और उनके मंदिर में परिक्रमा करनी चाहिए। इससे माता लक्ष्मी की कृपा भी प्राप्त होती है।