रिपोर्ट: सत्यम दुबे
नई दिल्ली: जब आपकी कठोर मेहनत सफलता बन जाती है तब सामने आती है शार्दुल ठाकुर जैसे युवा क्रिकेट की कहानी। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले गये बॉर्डर-गावरस्कर ट्रॉफी में शार्दुल ठाकुर को टीम में खेलने का मौका मिला। आपको बता दें ब्रिस्बेन के गाबा मैदान पर खेले गये सीरीज के अंतिम मैच में शार्दुल ठाकुर भी जीत के वजीरों में से एक रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया फतह करने के बाद जब वो अपने घर लौटे तो क्रिकेट फैन्स ने शार्दुल का जोरदार स्वागत किया। फैन्स उनकी एक झलक पाने को आतुर दिखे।
आपको बता दें कि तीन साल पहले जब वो साउथ अफ्रीका दौरे पर गये थे तो वहां से लौटने पर किसी ने उन्हें पहचाना तक नहीं था। यह घटना साल 2018 की है। शार्दुल ने अपने घर पालघर जाने के लिए अंधेरी से लोकल ट्रेन पकड़ी थी। उस वक्त यात्रियों से भरी ट्रेन में भारतीय टीम के इस गेंदबाज को किसी ने पहचाना नहीं था। अब शार्दुल ठाकुर का एक झलक पाने के लिए फैंस काफी आतुर रहते हैं।
एक इंटरव्यू के दौरान उन्होने कहा कि “साउथ अफ्रीका से लौटने के बाद मैंने अंधेरी में ट्रेन पकड़ी। मैंने हेडफोन लगा रखा था और जल्दी से घर पहुंचना चाहता था। जो लोग मुझे ट्रेन में देख रहे थे, वे सोच रहे थे कि क्या मैं सच में शार्दुल ठाकुर हूं या नहीं।“
आगे उन्होने कहा कि “कुछ कॉलेज के छात्रों ने मेरी फोटो गूगल पर सर्च की और निश्चिंत होने के बाद उन्होंने सेल्फी के लिए पूछा। मैंने उनसे कहा कि पालघर पहुंचने दें, फिर सेल्फी लेते हैं। मेरे साथ ट्रेन के अपार्टमेंट में सफर कर रहे कई लोग आश्चर्यचकित थे कि भारतीय क्रिकेटर उनके साथ सफर कर रहा था” ।