रिपोर्ट: सत्यम दुबे
नई दिल्ली: आचार्य चाणक्य का नाम आते ही लोगो में विद्वता आनी शुरु हो जाती है। आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति और विद्वाता से चंद्रगुप्त मौर्य को राजगद्दी पर बैठा दिया था। इस विद्वान ने राजनीति,अर्थनीति,कृषि,समाजनीति आदि ग्रंथो की रचना की थी। जिसके बाद दुनिया ने इन विषयों को पहली बार देखा है। आज हम आचार्य चाणक्य के नीतिशास्त्र के उस नीति की बात करेंगे, जिसमें उन्होने बताया है कि समय रहते कर लेने चाहिए ये तीन काम।
आचार्य. चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र में बताया है कि व्यक्ति को जीवित रहते हुए समाज के हित में काम कर लेने चाहिए। मौका मिलने पर अच्छे और जनकल्याण के लिए कार्य करने से व्यक्ति को सम्मान प्राप्त होता है। जब तक शरीर में रोग नहीं है, तभी तक व्यक्ति जन हित में काम कर सकता है। अच्छे काम करने वालों को सम्मान मिलता है और मृत्यु के बाद भी उन्हें सम्मान के साथ याद किया जाता है।
आचार्य चाणक्य आगे कहते हैं हर काम को समय रहते पूरा कर लेना चाहिए। काम को कल पर टालना अच्छा नहीं होता है। चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति का शरीर जब सेहतमंद होता है, तभी व्यक्ति को कार्यों को पूरा कर लेना चाहिए। बाद में व्यक्ति के शरीर को रोग लग जाते हैं और काम करने की क्षमता कम होती जाती है। वह पहले जैसी स्थिति में नहीं रहता है।
आचार्य़ ने अपने नीति शास्त्र में कहा है व्यक्ति हमेशा बुरे कामों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। जब तक आपका जीवन निरोगी है, तब तक आपको पुण्य कर लेने चाहिए। इसके साथ ही कभी भी दूसरों के लिए बुरे विचार नहीं लाने चाहिए। आत्मा को शुद्ध करना जरूरी है।