रिपोर्ट: सत्यम दुबे
हजारीबाग(झारखंड): कोरोना महामारी के दूसरे लहर का कहर लगातार जारी है। कोरोना से संक्रमित मरीज ऑक्सीजन और दवाईयों की कमीं से लगातार दम तोड़ रहें हैं। महामारी के दूसरे लहर ने कई हंसते-खेलते परिवारों को तबाह कर दिया है। झारखंड में हाजारीबाग जिले की बेटियों ने ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी तारीफ इलाके में जमकर हो रही है। दरआसल, यहां एक महिला की मौत के बाद कोई उसका अंतिम संस्कार करने नहीं आया तो बेटियों ने बेटों का फर्ज निभाकर अपनी मां की अर्थी को कंधा देकर श्मशान तक लेकर गईं। जहां उन्होंने पूरे विधि विधान से मां का अंतिम संस्कार किया।
आपको बता दें कि हजारीबाग जिले के खम्भवा गांव में कुंती देवी (55) नाम की महिला का सोमवार को निधन हो गया था। मृतका की बेटियां रोती-बिलखती रहीं, लेकिन जाति-बिरादरी के लोग अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुए। और वजह कुंती देवी के परिवार को समाज के लोग किसी कारणवश बहिष्कृत कर चुके हैं। जिसके चलते कोई श्मसान घाट तक नहीं गया।
कुंती देवी का कोई बेटा नहीं था, उन्हें 8 बेटियां हैं। घंटों इंतजार करने के बाद इन बेटियों ने खुद ही मां का अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया। इसके बाद वह अर्थी को कंधा देकर शमसान तक रोते-बिलखते पहुंची। जहां सभी बहनों ने मिलकर अपनी मां का विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया।
अर्थी को कंधा देने वाली एक बेटी ने कहा किसी का बेटा नहीं होता तो उसके माता-पिता का अंतिम संस्कार नहीं होता है। हमारा कोई भाई नहीं है तो हम कुछ नहीं भाई नहीं हैं तो क्या हुआ, हम सभी बहनें मिलकर सारे क्रियाकर्म करेंगे। कंधा देनेवालों में अजंती, रेखा, देवकी, बाबुन कुमारी, केतकी कुमारी, भोली कुमारी थीं।
मृतका कुंती देवी चार साल पहले बीमार थीं, कुछ समय बाद लकवा से पीड़ित हो गईं। जिसके चलते वह चलने-फिरने में असमर्थ थीं। वहीं मृतका की 8 बेटियां में सात की शादी हो चुकी है। उसके पति देहाड़ी मजदूरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण करते है।