भगवान शिव का अति प्रिय माह कहा जाने वाला सावन छह जुलाई से शुरू हो रहा है। इस माह में भगवान शिव की पूजा करने का विधान है।
माना जाता है कि इस माह जो रोज़ भगवान शिव की पूजा करता है उसे शिव सदैव प्रसन्न रहने का वर दे देते है। लेकिन क्या आप जानते है कि इसके पीछे एक पौराणिक कथा का संदर्भ है।
भगवान शंकर जी का जलाभिषेक करने के पीछे समुद्र मंथन की कथा का संबंध है। दरअसल श्री विष्णु के कहने पर जब देवता और दानवों ने समुद्र मंथन किया तो उसमें से विष भी निकला। उस विष को इस सृष्टि की रक्षा के लिए महादेव ने पी लिया।
इससे उनका शरीर बहुत ही ज्यादा गर्म हो गया जिससे शिवजी को काफी परेशानी होने लगी थी। उनको इस तकलीफ में देख कर इंद्र देव ने खूब बारिश करवाई जिससे उनको राहत मिली थी।
माना जाता है कि यह घटना सावन में हुई थी और तब से ही सावन माह में शिव का जल से अभिषेक करने के नियम की शुरुआत हुई।
सावन में पड़ने वाले सोमवार के दिन भगवान शिव की विशेष पूजा होती है। इस साल सावन में अद्भुत संयोग बन रहा है। श्रावण माह की शुरूआत सोमवार से हो रही है और इसका अंत भी सोमवार के दिन होगा।