उज्जैन से एक भावुक कर देने वाली खबर सामने आई है। महज 4 महीने की मासूम बच्ची जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रही है। बच्ची को एक दुर्लभ और गंभीर बीमारी स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी यानी Spinal Muscular Atrophy टाइप-1 डायग्नोज हुई है। जिसका इलाज बेहद महंगा है। परिवार ने अब देशवासियों से मदद की अपील की है।
उज्जैन की रहने वाली 4 महीने की काशी, जो अभी ठीक से दुनिया को देख भी नहीं पाई। वह एक गंभीर जेनेटिक बीमारी से जूझ रही है। परिजनों के मुताबिक, जन्म के बाद से ही बच्ची के हाथ-पैरों में हरकत कम थी। सांस लेने और निगलने में भी दिक्कत होने लगी। जब डॉक्टर को दिखाया गया तो शुरुआती जांच में ही SMA टाइप-1 होने की आशंका जताई गई। इसके बाद खून की जांच करवाई गई, जिसमें यह बीमारी कंफर्म हो गई। फिलहाल बच्ची का इलाज AIIMS Bhopal में चल रहा है।
डॉक्टरों के अनुसार, इस बीमारी में शरीर की मांसपेशियां धीरे-धीरे कमजोर हो जाती हैं। बच्चा न तो ठीक से हाथ-पैर हिला पाता है और न ही सामान्य रूप से सांस ले पाता है। अगर समय पर इलाज न मिले, तो यह जानलेवा भी साबित हो सकती है।
इस बीमारी का इलाज एक खास इंजेक्शन से होता है, जो भारत में उपलब्ध नहीं है। इसे अमेरिका से मंगवाना पड़ता है और इसकी कीमत करीब 15 करोड़ रुपए बताई जा रही है।
परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं है कि इतनी बड़ी राशि जुटा सके। ऐसे में माता-पिता ने अब लोगों से मदद की गुहार लगाई है। QR कोड के माध्यम से चैरिटी कैंपेन शुरू किया गया है, ताकि अधिक से अधिक लोग सहयोग कर सकें।
परिजनों ने बताया कि उन्होंने शासन-प्रशासन और मुख्यमंत्री तक पहुंचने की कोशिश की, लेकिन अभी तक कोई सहायता नहीं मिल पाई है। बच्ची की मां डॉ. प्रकृति सिसोदिया और पिता डॉ. रोहित दुबे ने भावुक अपील करते हुए कहा है कि उनकी बेटी को बचाने के लिए हर संभव मदद की जरूरत है।
उज्जैन से संवाददाता प्रियंक की रिपोर्ट