बुरहानपुर के श्री गोकुल चंद्रमाजी मंदिर में करीब 220 वर्ष पुरानी हस्तलिखित श्रीमद्भागवत महापुराण आज भी सुरक्षित है। संवत 1862 में संस्कृत भाषा में लिखी गई इस दुर्लभ पांडुलिपि की रोज पूजा-अर्चना की जाती है और यह भारतीय संस्कृति व धार्मिक विरासत का अनमोल प्रतीक बनी हुई है।
