21 जून को एक बड़ी खगोलीय घटना होने वाली है और वो है सूर्य ग्रहण। ये ग्रहण इसलिए ख़ास है क्यूंकि 500 साल बाद 6 वक्री ग्रहो के साथ मिथुन राशि में ये ग्रहण लगने वाला है।
आपको इसका प्रभाव समझने के लिए ग्रह स्थिति समझनी होगी। बुध, गुरु, शुक्र और शनि वक्री रहेंगे वही राहु केतु वक्री रहते है। सूर्य मिथुन में होगा जहां पहले से राहु विराजमान है। राहु सूर्य को पीड़ित करेगा।
शनि मकर में है जो सूर्य से आठवां हो जाएगा। मंगल मीन राशि में है जो जल तत्व राशि है। मंगल अपनी चौथी दृष्टि से मिथुन को देख रहा है।
इस ग्रहण के बाद उत्तर भारत में भारी उत्पात देखने को मिल सकता है। राहु सूर्य मंगल के संयोग से आगजनी, राजनीतिक लड़ाई, सेना पर हमले, अराजकता जैसी चीज़े होगी।
मंगल के मीन राशि में होने के कारण उत्तर भारत में जल प्रलय आ सकती है। नदी किनारे जो शहर बसे है वहां कोरोना के कारण हालात बेकाबू हो सकते है।
अफगानिस्तानम कश्मीर, यूपी, मध्यप्रदेश में इसका सबसे बुरा असर दिखाई देगा। पीओके में बगावत हो सकती है। उस दौरान भारत पाकिस्तान में तनाव चरम पर होगा।
राजा का कारक सूर्य अति पीड़ित होने से पीएम मोदी दबाब में रहेंगे। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की सुरक्षा और कड़ी करनी होगी। एमपी में बाढ़ आ सकती है। पूर्वोत्तर राज्यों में इस बार अन्न उत्पादन घट सकता है।
जल तत्व राशि में मंगल है और चूँकि मंगल के ही नक्षत्र में ग्रहण हो रहा है तो पानी के पास जो शहर है जैसे दिल्ली, मुंबई, चेन्नई यहां भीषण संकट आएगा। आषाढ़ माह में आने वाले सूर्य ग्रहण को शुभ नहीं कहा गया है।
आज से 19 साल पहले भी 21 जून को सूर्य ग्रहण हुआ था। उस दौरान भी ६ ग्रह वक्री थे। इसी साल सितंबर में ओसामा बिन लादेन ने अमेरिका पर हमला किया था और आतंक की परिभाषा बदल गयी थी।
इस्लामिक आतंक हो या जिहाद, ये शब्द सब उस सूर्य ग्रहण के बाद अस्तित्व में आये और दुनिया दो हिस्सों में बट गयी। अब 19 साल बाद वही 21 जून को ग्रहण आएगा। बड़ी राजनीतिक घटनाएं होगी।
अफगानिस्तान, तालिबान, चीन, अमेरिका जैसी जगह पर बड़े भारी उपद्रव के संकेत है। चीन के खिलाफ गुस्सा चरम पर होगा। कुल मिलाकर यह ग्रहण विनाशकारी साबित होगा।