महाराष्ट्र में कोरोना वायरस का कहर सबसे अधिक देखा गया है। आपको बता दे की कोरोना वायरस के चलते लगाए गए प्रतिबंधों में फिलहाल मंदिरों के कपाट बंद रखे गए हैं और अब राज्य में इस बात पर राजनीति शुरू हो गई है।
इस बाबत राज्य की गठबंधन वाली शिवसेना वाली सरकार का विरोध जारी है। आपको बता दे की राज्यपाल ने इस पुरे मामले पर कहा कि यह विडंबना है कि एक तरफ सरकार ने बार और रेस्तरां खोल दिए हैं, लेकिन मंदिर नहीं खोले गया। ऐसा न करने के लिए आपको दैवीय आदेश मिला या अचानक से सेक्युलर हो गए।

राज्यपाल के इस पत्र पर उद्धव ने भी जवाब लिखकर दे दिया। उन्होंने लिखा- जैसे तुरंत लॉकडाउन लगाना ठीक नहीं था। वैसे ही तुरंत ही इसे हटाना ठीक नहीं है। और हां, मैं हिंदुत्व को मानता हूं। मुझे आपसे हिंदुत्व के लिए सर्टिफिकेट नहीं चाहिए।
उद्धव ठाकरे ने लिखा है कि महाराष्ट्र में धार्मिक स्थल खोलने की चर्चा के साथ कोरोना के बढ़ते मामलों का भी ध्यान रखना चाहिए। मुझे अपना हिंदुत्व साबित करने के लिए आपसे सर्टिफिकेट नहीं चाहिए।
It was brought to my notice through the media, a letter written by the Hon. Governor of Maharashtra to the @CMOMaharashtra
In this letter the Hon. Governor has sought the intervention of the Chief Minister to open up religious places for the public. pic.twitter.com/1he2VOatx3
— Sharad Pawar (@PawarSpeaks) October 13, 2020
इस पुरे मामले के बाद एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने पीएम मोदी को चिट्ठी लिखी थी। वही हाल ही में एक न्यूज़ चैनल को दिए गए इंटरव्यू में देश के गृह मंत्री अमित शाह ने भी कहा की राज्यपाल को इसी भाषा से बचना चाहिए था।
इस बयान के बाद एक बार फिर एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने राज्यपाल पर निशाना साधा है। उन्होंने आज जारी किए गए एक बयान में कहा है कि अगर कोई आत्मसम्मान वाला व्यक्ति होता तो पद पर नहीं बना रहता।
आपको बता दे, इस मसले पर एआईएमआईएम प्रमुख ओवैसी ने भी ट्वीट कर अपनी राय दी थी। उन्होंने लिखा था कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि यह राज्यपाल द्वारा किया जा रहा है, जिसने संविधान की शपथ ली है।