रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) वीके यादव ने शुक्रवार को कहा कि ”आत्मनिर्भर भारत” अभियान को बढ़ावा देने के तहत मुंबई और अहमदाबाद के बीच चलाई जाने वाली बुलेट ट्रेन परियोजना से संबंधित 72 फीसदी ठेके स्थानीय कंपनियों को दिए जाएंगे।
एसोचैम द्वारा आयोजित एक वेबिनार के दौरान यादव ने कहा कि पुल एवं सुरंग बनाने जैसे उच्च मूल्यों के अधिकतर तकनीकी कार्य भारतीय ठेकेदारों द्वारा संभाले जाएंगे जबकि सिग्नल और टेलिकॉम से संबंधित कार्य जापानी कंपनियों द्वारा संभाले जाएंगे।
बुलेट ट्रेन की 508 किलोमीटर लंबी इस परियोजना के लिए आने वाली अनुमानित लागत 1.10 लाख करोड़ होगी, जिसमें से 88,000 करोड़ की राशि जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (जेआईसीए) द्वारा भारत को कर्ज के तौर पर मुहैया कराई जाएगी।
रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) वीके यादव कहा, ” जापान की सरकार से विस्तृत चर्चा के बाद, हमने पूरी परियोजना का 72 फीसदी ठेका भारतीय कंपिनयों के लिए रखा है।”
आप को बता दे कि बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र की टॉप कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) ) को अक्टूबर में 25,000 करोड़ रुपये का टेंडर मिला था। यह ठेका मुंबई-अहमदाबाद के बीच 237 किमी लंबे रूट के डिजाइन और निर्माण के लिए है। मुंबई और अहमदाबाद के बीच बुलेट ट्रेन की कुल लंबाई 508 किमी है।
नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन ने 24 सितंबर को अहमदाबाद-मुंबई बुलेट रेल परियोजना के लिए करीब 1.08 लाख करोड़ रुपये की बोलियों को खोला था। इसमें परियोजना का गुजरात में पड़ने वाला हिस्सा शामिल है।
इसमें वापी और वडोदरा के बीच 237 किमी लंबे कॉरिडोर का निर्माण किया जाएगा। इसमें चार स्टेशन वापी, बिलिमोर, सूरत और भरूच व सूरत डीपो शामिल है।