हर माह में एक अमावस और एक पूर्णिमा होती है। 30 दिन के महीने में दो पक्ष शुक्ल और कृष्ण पक्ष होते है। किसी भी माह की शुरुआत कृष्ण पक्ष से होती है और उसका अंत शुक्ल पक्ष से होता है।
शुक्ल पक्ष की जो आखिरी तिथि होती है उसी तिथि को पूर्णिमा कहा जाता है। इस दिन चन्द्रमा पूर्ण बलवान होता है। श्रावण माह की पूर्णिमा के दिन चंद्रमा श्रवण नक्षत्र में होता है।
इस दिन भी दान, पुण्य करने का बहुत महत्व होता है। इस दिन भाई की कलाई पर राखी बांधने के अलावा ब्राहमणों, गुरुओं और परिवार में छोटी लड़कियों द्वारा संबंधियों को भी रक्षासूत्र बांधा जाता है।
इस दिन को इसलिए भी बड़ा उत्तम दिन माना गया है क्योंकि इसी दिन ब्राह्मण जनेऊ बदलते है। सावन की पूर्णिमा के दिन पवित्र स्थानों से लाया गया जल कांवरिये शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं। और कावड़ यात्रा को संपन्न करते हैं।
श्रावण पूर्णिमा के दिन ब्राह्मण को भोजन अवश्य करवाना चाहिए और अपनी श्रद्धा के अनुसार दान दक्षिणा देकर उन्हें विदा करना चाहिए।
श्रावण पूर्णिमा के दिन किसी पवित्र नदी में स्नान करके गाय को चारा अवश्य खिलाना चाहिए।