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चंद्रयान-2 का जिक्र कर छात्रों से बोले पीएम मोदी- विफलताओं में भी सफलता की शिक्षा पा सकते हैं

By: RNI Hindi Desk 
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चंद्रयान-2 का जिक्र कर छात्रों से बोले पीएम मोदी- विफलताओं में भी सफलता की शिक्षा पा सकते हैं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 जनवरी सोमवार को परीक्षा पे चर्चा किया। तालकटोरा स्टेडियम में पीएम मोदी ने छात्रों को परीक्षा के तनाव से बचने के कई टिप्स दिए, जिसमें उन्होंने चंद्रयान-2 से लेकर क्रिकेट तक का जिक्र किया।

पीएम मोदी ने कहा कि, यह नया साल और दशक आपके और पूरे देश के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण है। इस नए दशक में जो कुछ भी होगा वह सीधे उन छात्रों से संबंधित होगा जो वर्तमान में दसवीं और बारहवीं कक्षा में पढ़ रहे हैं।

अगर कोई मुझे कहे कि इतने कार्यक्रमों के बीच वो कौन सा कार्यक्रम है जो आपके दिल के सबसे करीब है, तो मैं कहूंगा वो कार्यक्रम है परीक्षा पे चर्चा। युवा मन क्या सोचता है, क्या करना चाहता है, ये सब मैं भली-भांति समझ पाता हूं। परिक्षा पे चरचा मेरे दिल के सबसे करीब की घटना है। पूरे देश के हजारों स्कूल इसमें भाग लेते हैं और मुझे लगता है कि देश के युवा कैसे सोचते हैं और क्या करना चाहते हैं।

जैसे आपके माता-पिता के मन में 10वीं, 12वीं को लेकर टेंशन रहती है, तो मुझे लगा आपके माता-पिता का भी बोझ मुझे हल्का करना चाहिए। मैं भी आपके परिवार का सदस्य हूं, तो मैंने समझा कि मैं भी सामूहिक रूप से ये जिम्मेदारी निभाऊं।

क्या कभी हमने सोचा है कि मूड ऑफ क्यों होता है? अपने कारण से या बाहर के किसी कारण से। अधिकतर आपने देखा होगा कि जब मूड ऑफ होता है, तो उसका कारण ज्यादातर बाह्य होते हैं। उदाहरण देते हुए उन्होंने, चंद्रयान II। पूरे देश ने अपनी असफलता के बारे में विचार किया। कई बार असफलता हमें कमजोर कर देती है। मैं भी वहां मौजूद था। कुछ लोगों ने मुझे वहाँ नहीं जाने के लिए कहा था क्योंकि वहाँ कोई सिक्योरिटी नहीं थी।

हम विफलताओं मैं भी सफलता की शिक्षा पा सकते हैं। हर प्रयास में हम उत्साह भर सकते हैं और किसी चीज में आप विफल हो गए तो उसका मतलब है कि अब आप सफलता की ओर चल पड़े हो। जाने अनजाने में हम लोग उस दिशा में चल पड़े हैं जिसमें सफलता -विफलता का मुख्य बिंदु कुछ विशेष परीक्षाओं के मार्क्स बन गए हैं। उसके कारण मन भी उस बात पर रहता है कि बाकी सब बाद में करूंगा, एक बार मार्क्स ले आऊं।

सिर्फ परीक्षा के अंक जिंदगी नहीं हैं। कोई एक परीक्षा पूरी जिंदगी नहीं है। ये एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। लेकिन यही सब कुछ है, ऐसा नहीं मानना चाहिए। मैं माता-पिता से भी आग्रह करूंगा कि बच्चों से ऐसी बातें न करें कि परीक्षा ही सब कुछ है।

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