रिपोर्ट- पल्लवी त्रिपाठी
नवरात्रि का पर्व 13 अप्रैल से शुरू हो गया है । नवरात्रि में हर दिन मां दुर्गा के अलग-अलग अवतारों की पूजा की जाती है । नवरात्रि का चौथा दिन कुष्मांडा को समर्पित है । आज हम आपको मां कुष्मांडा के रूप, कथा, पूजन विधि व जप मंत्र आदि के बारे में बताने जा रहे हैं ।
देवी कुष्मांडा की कथा-
मां कुष्मांडा का शाब्दिक अर्थ है- कुम्हड़ा । पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां दुर्गा ने असुरों के अत्याचार से संसार को बचाने के लिए देवी कुष्मांडा का अवतार लिया था । देवी कुष्मांडा ने ही पूरे ब्रह्मांड की रचना की थी । मान्यता है कि पूजा के दौरान अगर देवी के सामने कुम्हड़े की बलि दी जाएं, तो मां प्रसन्न होती है ।
कुष्मांडा देवी का रूप-
देवी कुष्मांडा का रूप बेहद भव्य है । उनकी अष्टभुजाएं हैं । देवी ने अपने हाथों में धनुष-बाण, चक्र, गदा, अमृत कलश, कमल और कमंडल धारण किए हुए है । साथ ही मां ने हाथ में सिद्धियों और निधियों से युक्त माला ली हुई है । मां कुष्मांडा सिंह यानी शेर पर सवार हैं ।
मां कुष्मांडा की पूजन विधि-
नवरात्रि के चौथे दिन यानी मां कुष्मांडा के दिन सुबह प्रात: उठकर स्नान कर लें और लाल रंग के वस्त्र धारण कर लें । जिसके बाद मां कुष्मांडा का ध्यान करें और उन्हें सिंदूर, धूप, गंध, अक्षत् आदि अर्पित करें । ध्यान रखें देवी कुष्मांडा की पूजा-अर्चना के दौरान मां को लाल रंग के फूल चढ़ाएं, लाल रंग मां कुष्मांडा को बेहद प्रिय है । इन सबके बाद माता के सामने सफेद कुम्हड़े की बलि अर्पित करें । साथ ही मां को दही और हलवे का भोग लगाएं ।
यदि आप मां कुष्मांडा को प्रसन्न करना चाहते हैं । तो इन मंत्रों के जाप से आपके जीवन में यश, बल, वैभव का आगमन होगा । साथ ही आपका स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा । जिससे आपकी आयु में वृद्धि होगी । नवरात्रि के चौथे दिन इन मंत्रों का जाप करें-
ॐ देवी कूष्माण्डायै नम:॥
बीज मंत्र
कूष्मांडा ऐं ह्री देव्यै नम:
प्रार्थना
सुरासम्पूर्ण कलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥
स्तुति-
या देवी सर्वभूतेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥