हर साल श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी के दिन नागपंचमी का त्योहार मनाया जाता है। आज देश में धूमधाम से यह पर्व मनाया जाएगा।
हमारे भारतीय दर्शन में सभी प्राणियों में परमात्मा को देखने का विधान है। प्रकृति और उसमें रहने वाले जीवों के प्रति इतना उदार शायद ही कोई धर्म होगा जितना हिन्दू धर्म है।
आपको बता दे कि महाभारत में नाग और नाग लोक की उत्पत्ति का वर्णन मिलता है। नाग माता कद्रू और विनता से सारे सर्पों की उत्पत्ति हुई है।
ऐसी मान्यता है कि नाग देवता की पूजा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और मनचाहा वरदान देते हैं। इसके अलावा कापसर्प दोष से पीड़ित लोगों को इस दिन लाभ होता है।
नागपंचमी के दिन आठ नागों की पूजा होती है। इनमें अनन्त, वासुकि, पद्म, महापद्म, तक्षक, कुलीक, कर्कट और शंख हैं।
जब किसी जातक की कुंडली में राहु और केतु के बीच में सारे ग्रह आ जाते हैं तब कुंडली में कालसर्प दोष बनता है। ज्योतिष के अनुसार, कुंडली में 12 प्रकार के काल सर्प दोष बनते हैं।
कालसर्प योग है तो नागपंचमी के दिन किसी भी शिव मंदिर में नाग-नागिन का जोड़ा चढ़ा कर आएं। जोड़ा चांदी का, स्वर्ण का, पंचधातु का, तांबे का या अष्ट धातु का होना चाहिए।
नागपंचमी के दिन ही शिव मंदिर में 1 माला शिव गायत्री का जाप करे।
‘ॐ नागदेवतायै नम:’ या नाग पंचमी मंत्र ‘ॐ नागकुलाय विद्महे विषदन्ताय धीमहि तन्नौ सर्प प्रचोद्यात्.’ का जाप करे।