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नई दिल्ली: भारत सरकार का रेलवे नेटवर्क के विकास में अप्रतिम योगदान, जर्मनी के रेलवे से है कम्पैरिजन

आजादी के बाद से भारतीय रेल का राजनीतिकरण हो रहा है। यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान भारतीय रेल ट्रेक बनाने में कोई जोर नहीं दिया गया। वहीं जब देश में ब्रिटिश शासन था तब भारत में रेल की पहली शुरुआत हुई थी। देखा जाए तो उस समय ब्रिटिश शासकों ने अपनी प्रशासनिक सुविधा बढ़ाने के लिए देश में रेल की नींव डाली थी।

By RNI Hindi Desk 
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आजादी के बाद से भारतीय रेल का राजनीतिकरण हो रहा है। यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान भारतीय रेल ट्रेक बनाने में कोई जोर नहीं दिया गया। वहीं जब देश में ब्रिटिश शासन था तब भारत में रेल की पहली शुरुआत हुई थी। देखा जाए तो उस समय ब्रिटिश शासकों ने अपनी प्रशासनिक सुविधा बढ़ाने के लिए देश में रेल की नींव डाली थी।

लेकिन देश की सबसे पूरानी पार्टी ने खुद उसी जमीन पर जन्म लेकर, आम जनता के लिए भारतीय रेलवे का महत्व नहीं समझा। भारतीय रेल के बुनियादी ढांचे को आधुनिक व क्षमता वृद्धि करने के उद्देश्य से केंद्र में आई मोदी सरकार ने कई दशकों से भटके हुए ट्रेक को पटरी पर लाने का काम किया है। जो इंफ्रास्चट्रक्चर यूपीए सरकार के कार्यकाल में होना चाहिए था वो 2014 के बाद एनडीए की मोदी सरकार ने एक दशक में विभागीय बजट द्वारा 800 प्रतिशत का बजटीय स्पोर्ट में इजाफा करके कर दिया है।

 

भारतीय रेलवे सम्पूर्ण भारत में लगभग हर लोगों के जीवन में अपना महत्व बना रहा है। इसी दौरान भारत के रेल नेटवर्क में जर्मनी रेल के बाद 25,434 किलोमीटर नई रेल लाइनों को बिछाने का काम किया है। एक साल में 2022-23 में स्विटजरलैंड रेल के बराबर 5,243 किलोमीटर नई रेल लाइनें देश के रेल नेटवर्क से जुड़ी हैं। रेल संबंधी संसद की स्थायी समिति के अध्यक्ष और बीजेपी नेता राधा मोहन सिंह ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन और रूस के बाद भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा तेजी से बढ़ता हुआ रेलवे नेटवर्क है।

नई रेलवे लाइनों में 75% की वृद्धि

भारतीय रेलवे प्रतिदिन 12,000 यात्री ट्रेनों के माध्यम से 2.19 करोड़ यात्रियों (सालाना 800 करोड़ यात्री) को गंतव्य स्थान पर पहुँचाती है। भारत के राष्ट्रीय परिवहन रेल के बुनीयादी ढाचे की क्षमता में वृद्धि के लिए केद्र सरकार फोकस कर रही है। वर्ष 2013-14 के लिए 29,055 करोड़ रेल बजट आवंटित किया गया था। केंद्र सरकार ने 2023-24 में इसे बढ़ाकर 2.40 लाख करोड़ रुपये कर दिया। 2013- 14 में यूपीए सरकार की तुलना में रेल बजट में 8 गुना की वृद्धि की गई थी।

 

भारतीय रेल के बुनियादी ढांचे को आधुनिकता के साथ उसके क्षमता में वृद्धि करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक दशक में विभागीय बजट में 800 फीसदी की बढ़ोत्तरी की है। इस दौरान भारत के रेल नेटवर्क में जर्मनी रेल के बाद 25,434 किलोमीटर नई रेल लाइनों को बिछाया गया है। वहीं साल 2022-23 में स्विटजरलैंड रेल के बराबर 5243 किलोमीटर नई रेल लाइन, देश के रेल नेटवर्क में जोड़ी गई हैं।

रेल संबंधी संसद की स्थायी समिति के अध्यक्ष भाजपा नेता राधा मोहन सिंह ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन और रूस के बाद भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा तेजी से बढ़ता हुआ रेलवे नेटवर्क है। भारतीय रेलवे प्रतिदिन 12,000 यात्री ट्रेनों के माध्यम से 2.19 करोड़ यात्री (सालाना 800 करोड़ यात्री) गंतव्य पहुँचाती है।

 

साल 2013-14 के लिए 29,055 करोड़ रेल बजट आवंटित किया गया था। केंद्र सरकार ने 2023-24 में इसे बढ़ाकर 2.40 लाख करोड़ रुपये कर दिया। 2013 14 में यूपीए सरकार में की तुलना में रेल बजट में 8 गुना की गई। 2004-2014 के दौरान 14,985 किलोमीटर नई रेल लाइन बिछायी गई, जबकि पिछले लगभग एक दशक (2014-23) में 25,871 रूट किलोमीटर ट्रैक बिछाने का काम किया गया है। यह नई रेलवे लाइनों में 75% की वृद्धि है।

 

2014 के बाद से 14,337 किलोमीटर रेलवे लाइन दोहरीकरण कार्य शुरू

 

साल 2022-23 में प्रतिदिन 14 किमी रेल लाइनों को बिछाया गया और आगामी वित्तीय वर्ष में 16 किमी प्रतिदिन रेल लाइन बिछाने का लक्ष्य रखा गया है। 2014 के बाद से 14,337 किलोमीटर रेलवे लाइन दोहरीकरण कार्य शुरू किया गया। 2014 से अब तक 5,750 किलोमीटर लंबाई का गेज परिवर्तन शुरू किया गया है 2014 के बाद से रेलवे विद्युतीकरण परियोजनाओं पर खर्च की गई राशि 5 गुना (375% से अधिक) बढ़ गई है।

 

अमृत भारत योजना के तहत अब तक विकास के लिए 1309 स्टेशनों की पहचान की गई है। हाल ही में माननीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 508 रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास की आधारशिला रखी। 24,470 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 508 स्टेशनों का पुनर्विकास किया जाएगा। देश में आम लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही सेमी हाई स्पीड वंदे भारत ट्रेनें की संख्या बढ़ रही है। अत्याधुनिक स्वदेशी तकनीक व विश्व स्तरीय यात्री सुविधाओ से लैसे 35 जोड़ी 70 ट्रेने वंदे भारत ट्रेने चलाई जा चुकी है।

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