राज्यपाल के अभिभाषण के बाद मध्य प्रदेश विधानसभा की कार्यवाही कल सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है। राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा कल से प्रारंभ होगी, जबकि 18 फरवरी को विधानसभा में बजट पेश किया जाएगा।
अपने अभिभाषण के दौरान मंगूभाई पटेल ने कहा कि 17 दिसंबर 2025 को आयोजित विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र में मध्यप्रदेश को विकसित राज्य बनाने को लेकर 12 घंटे तक सार्थक चर्चा हुई थी, जिसमें कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए। उन्होंने कहा कि देश और प्रदेश एक ऐसे दौर में प्रवेश कर चुके हैं, जिसे केंद्र सरकार ने ‘अमृत काल’ की संज्ञा दी है। राज्यपाल ने प्रदेश में उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल, भोपाल में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर समिट और निवेश के बढ़ते अवसरों का उल्लेख किया। साथ ही उन्होंने बताया कि सरकार ने वर्ष 2047 तक मध्यप्रदेश को 2 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का संकल्प लिया है।
राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बीच में टोका और नल-जल योजना का मुद्दा उठाया। विपक्ष ने इंदौर में दूषित पानी की समस्या को लेकर भी विरोध दर्ज कराया। हालांकि, राज्यपाल ने बिना रुके अपना अभिभाषण जारी रखा।
अभिभाषण समाप्त होने के बाद उस पर कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्ताव पेश किए जाने की जानकारी दी गई। कांग्रेस विधायक सोहनलाल वाल्मीकि ने आरोप लगाया कि उन्हें अभिभाषण की प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई। इस पर विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने स्पष्ट किया कि राज्यपाल का अभिभाषण पढ़ा हुआ माना जाएगा।
विधानसभा के बजट सत्र में शामिल होने पहुंचे नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि बजट में केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत पर बात होनी चाहिए। उन्होंने प्रदेश के बढ़ते कर्ज को लेकर श्वेत पत्र लाने की मांग की और कहा कि कांग्रेस पुराने बजटों की घोषणाओं और उनकी वास्तविक स्थिति को सदन में उजागर करेगी।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि तीन आरोपित मंत्रियों को बजट सत्र में बैठने का अधिकार नहीं होना चाहिए। उन्होंने मंत्री विजय शाह का नाम लेते हुए कहा कि इस मुद्दे पर सरकार को सदन में जवाब देना चाहिए।
इससे पहले मुख्यमंत्री मोहन यादव, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विधानसभा पहुंचे राज्यपाल मंगूभाई पटेल का औपचारिक स्वागत किया। इसके बाद वंदे मातरम् के गायन के साथ सदन की कार्यवाही शुरू हुई। बजट सत्र के पहले ही दिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस के संकेत साफ नजर आए।