Home भाग्यफल 15 जनवरी को मकर संक्रांति : जानिये शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

15 जनवरी को मकर संक्रांति : जानिये शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

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हमारे हिन्दू पंचांग में साल में दो अयन होते है, एक होता है उत्तरायण और एक होता है दक्षिणायन, एक संवत यानी वर्ष में दो बार यह परिवर्तन होता है, सूर्य एक राशि में लगभग 1 माह रहता है और इस हिसाब से वो 1 साल में पूरी 12 राशियों का गोचर पूरा कर लेता है।

सूर्य जब शनि की राशि मकर राशि में आता है और जब तक यह मिथुन में रहता है उस समय को उत्तरायण और मिथुन से धनु तक के गोचर को दक्षिणायन कहा जाता है, सूर्य के मकर राशि में प्रवेश को ही मकर संक्रांति बोला जाता है और इस दिन देवताओ का दिन शुरू होता है, पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महाभारत युद्ध में गंगा पुत्र भीष्म पितामह ने इसी दिन अपने प्राणों का त्याग किया था और यही कारण है की इस दिन का धार्मिक महत्व है।

जब सूर्य उत्तरायण होता है तो तीर्थ यात्रा व उत्सवों का समय होता है. उत्तरायण के समय पौष-माघ मास चल रहा होता है इसीलिए इसी काल में नए कार्य, गृह प्रवेश , यज्ञ, व्रत – अनुष्ठान, विवाह, मुंडन जैसे कार्य करना शुभ माना जाता है।

आपको यह भी बता दे की साल भर की छ: ऋतुओं में से तीन ऋतुएं शिशिर, बसन्त और ग्रीष्म ऋतुएं उत्तरायण की होती है और इस साल 15 जनवरी को मकर संक्रांति का यह पर्व मनाया जायेगा, 3 दिन बाद 14 जनवरी की रात्रि में 2 बजकर 10 मिनट पर सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ ही यह पर्व शुरू हो जायेगा वही सूर्य के साथ बुद्ध की युति होने से बुद्ध आदित्य योग भी बनेगा।

हमारी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्राति के दिन से खरमास भी समाप्त हो जाता है और मंगल आयोजन शुरू हो जाते है, इस दिन पुण्यकाल सुबह 07:19 से 12:31 बजे तक और महापुण्य काल 07:19 से 09:03 बजे तक रहेगा जिसमे आप अपनी यथा शक्ति गुड़, तिल, कंबल, खिचड़ी, चावल आदि पुरोहितों या गरीबों को दान कर सकते है वही 15 जनवरी को सर्वाथ सिद्धि व रवि,कुमार योग का संयोग भी रहेगा।

जैसे ही सूर्य मकर राशि में आयेंगे वैसे ही विवाह, नूतन गृह प्रवेश, नया वाहन, भवन क्रय-विक्रय, मुंडन जैसे सारे शुभ कार्य शुरू हो जायेंगे। सूर्य के इस परिवर्तन से साल का पहला विवाह मुहूर्त 15 जनवरी को पड़ रहा है वही जनवरी से जून तक कुल 67 लग्न मुहूर्त है।

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