Home बिज़नेस इकोनॉमी की मौजूदा स्थिति को देखते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के समक्ष मौका है कि वह आयकर अधिनियम में भी बड़े सुधार करें और आम जनता को टैक्स बोझ से कुछ राहत भी दें

इकोनॉमी की मौजूदा स्थिति को देखते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के समक्ष मौका है कि वह आयकर अधिनियम में भी बड़े सुधार करें और आम जनता को टैक्स बोझ से कुछ राहत भी दें

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अगस्त, 2020 में पीएम नरेंद्र मोदी ने पारदर्शी कराधान मंच का उद्घाटन करते हुए कहा था कि सरकार ईमानदारी से कर का भुगतान करने वालों के सम्मान की व्यवस्था करेगी। इससे पहले वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव जीतने के बाद नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में अपने पहले भाषण के दौरान प्रधानमंत्री ने न्यू इंडिया का मंत्र देते हुए आम करदाताओं का विशेष ध्यान रखने की भी बात कही थी।

बाद में सरकार ने आयकर अधिनियम में भारी बदलाव के उद्देश्य से नया डायरेक्ट टैक्स कोड (डीटीसी) बनाने के लिए एक समिति भी गठित की थी और इसकी रिपोर्ट भी अगस्त, 2019 में आ गई। लेकिन अभी तक इसकी सिफारिशों पर भी कदम नहीं उठाए गए हैं।

जानकारों का कहना है कि इकोनॉमी की मौजूदा स्थिति को देखते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के समक्ष मौका है कि वह आयकर अधिनियम में भी बड़े सुधार करें और आम जनता को टैक्स बोझ से कुछ राहत भी दें। मांग की कमी से जूझती इकोनॉमी के लिए यह राहत बूस्टर डोज हो सकती है।

बजट की तैयारियों के संदर्भ में दिसंबर, 2020 के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अर्थशास्त्रियों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से अलग-अलग मुलाकात की। इन मुलाकातों के दौरान कई विशेषज्ञों ने उन्हें आम जनता को बचत के ज्यादा मौके और नकदी मुहैया कराने की सिफारिश की है। सूत्रों के मुताबिक कई अर्थविदों का यह सुझाव है कि देश की आर्थिक विकास दर को फिर से आठ प्रतिशत तक की रफ्तार देने के लिए घरेलू खपत बढ़ाने की हरसंभव कोशिश करनी होगी। यह काम व्यक्तिगत कर की दरों को घटाने या टैक्स बचत के सीधे उपायों के जरिये किया जा सकता है।

कुछ अर्थविदों का मानना है कि पिछले कई वर्षों से छोटी बचत योजनाओं के प्रति लोगों में उदासीनता बढ़ी है। इस स्थिति से निपटने के लिए इन योजनाओं को टैक्स छूट के जरिये नये सिरे से प्रोत्साहित करने का भी सुझाव वित्त मंत्री को दिया गया है। फिक्की व सीआइआइ जैसे उद्योग संगठनों ने भी वित्त मंत्रालय को जो सिफारिशें भेजी हैं उसमें व्यक्तिगत कर की दरों को घटाने व घरेलू बचत के लिए और उपाय करने को प्रमुखता दिया गया है।

इस संदर्भ में डीटीसी पर भाजपा के नेतृत्व वाली राजग सरकार की तरफ से गठित सिफारिशें उपयोगी साबित हो सकती हैं। वैसे, इस समिति की सिफारिशों को अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है लेकिन इसी मुद्दे पर पूर्ववर्ती संप्रग सरकार की तरफ से गठित समिति ने आयकर छूट की सीमा को बढ़ाकर तीन लाख रुपये करने और होम लोन पर देय ब्याज पर छूट सीमा में भारी वृद्धि करने जैसी तमाम सिफारिशें की थीं। हालांकि वर्तमान सरकार अतीत में कई बार इस बात का संकेत दे चुकी है कि आयकर कानून में बड़े संशोधन की सख्त जरूरत है।

डेलॉय इंडिया की पार्टनर ताप्ति घोष का कहना है कि, आम जनता को उम्मीद है कि इस बार वित्त मंत्री आय कर की दरों को घटाएंगी और कर अदायगी की प्रक्रिया को और सरल बनाया जाएगा। वैसे, कर अदायगी को लेकर सरकार की तरफ से कोरोना काल में कई घोषणाएं की गई हैं लेकिन इससे आम जनता को सीधे कोई राहत नहीं मिल रही है। टैक्स स्लैब को घटाकर सरकार सीधे तौर पर आम जनता को राहत दे सकती है और नकद प्रवाह को बेहतर बनाने के साथ ही देश में उपभोग को बढ़ाने का काम कर सकती है।

वैसे, हमें यह भी उम्मीद है कि जिस तरह से बड़ी संख्या में लोग घरों से काम करने लगे हैं, इस संदर्भ में भी कुछ राहत दी जा सकती है। यह बहुत ही अच्छा होगा कि सरकार महामारी को लेकर बढ़ी जागरूकता को देखते हुए स्वास्थ्य पर होने वाले खर्च पर टैक्स राहत को भी बढ़ाए, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग स्वास्थ्य बीमा खरीद सकें।

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