वैदिक ज्योतिष में हर ग्रह की अपनी ऊर्जा होती है और वो स्थान, राशि और नक्षत्र के अनुसार अपना फल करता है, एक ग्रह अपना फल किस प्रकार देगा ये कई फैक्टर्स पर निर्भर रहता है और उनमे से एक है अन्य ग्रहो के साथ युति, अब ये एक ग्रह के साथ भी हो सकती है और 2 ग्रह के साथ भी तो आज हम बात करने वाले है बुध ग्रह की अन्य ग्रहों के साथ युति का फल कैसा होगा !
ज्योतिष में बुध को विवेक और तर्क का कारक माना गया है, बुद्ध बलवान हो तो जातक विवेकशील और बुद्धिमान होगा, सूर्य और बुध की युति को बुध आदित्य योग के नाम से जाना जाता है, इस योग की अगर बात करे तो एक चीज़ बहुत इम्पोर्टेन्ट है की बुध नपुंसक ग्रह है, वो जिसके साथ बैठ जाएगा उसके हिसाब से ही अपने कारक का फल करेगा।
यहां सूर्य बुध के फल में वृद्धि करेगा तो जातक को सम्मान के साथ साथ उच्च पद भी प्राप्त होता है, केतु शनि के सहयोग से बड़ा ज्योतिषी भी बन जायेगा, बुध और सूर्य की युति में अक्सर देखा जाता है की ऐसे लोग अच्छे अधिकारी और राजा के सलाहकार होते है।
बुध ज्योतिष में तर्क, विवेक, ज्ञान, खेल, गणित, ज्योतिषी है। चंद्र जब बुध के साथ युति करता है तो जातक बहुत पढ़ने लिखने वाला होता है, बुध राजयोग बनाकर बैठ जाए तो जातक धनवान हो जाएगा, बड़ा लेखक होगा, पत्रकार हो जाएगा।
चंद्र मन का कारक है और बुध के साथ इसका जुड़ाव हो जाए तो जातक बहुत अच्छी कहानियां लिखता है, बहुत बड़ा उपन्यास लिखने वाला होता है, बुध वकील है, ज्योतिषी है, गणितज्ञ है तो ऐसा आदमी बहुत बढ़िया ज्योतिषी हो जाएगा, कहते है की बुध के सहयोग के बिना कोई ज्योतिषी नहीं बन सकता तो चंद्र बुध की युति सोने पर सुहागा का काम करती है।
ज्योतिष में बुध को तीव्र बुद्धि वाला माना गया है वही मंगल तेज है और साहस है, तो इन दोनों ग्रहो की युति के कारण जातक अत्यधिक बुद्धिमान होगा, उसे बहुत देर तक बैठकर पढ़ने की आदत होगी, बुध मीडिया का कारक है तो ऐसा जातक मीडिया में अपना कैरियर बनायेगा, बुध वाणी का कारक है तो वकील, लेखक और ज्योतिषी भी होगा।
इस युति में एक बात यह भी देखी जाती है की अगर ग्रह पर पाप प्रभाव हो तो जातक झगड़ा करने वाला भी हो सकता है, वाद विवाद में नाम आना वही कई बार अदालती पचड़े में भी जातक पड़ जाता है, शुक्र अगर बलवान नहीं हो तो पत्नी से वाद विवाद की सम्भावना भी बनती है।
फलित में बुध और गुरु की युति को उत्तम माना गया है, बुध बुद्धि का कारक है और गुरु ज्ञान का तो ऐसे में जब इन दोनों ग्रहो की युति होती है तो जातक ज्ञानी और गुणी होता है, उसे कई गूढ़ विषयों की समझ होती है वही समाज में उसे काफी मान सम्मान प्राप्त होता है।
इस योग में अगर दोनों में से कोई भी एक ग्रह उच्च का हो जाये तो यह युति अत्यधिक बलवान हो जाती है और ऐसा व्यक्ति उच्च धार्मिक पद पर भी आसीन हो सकता है, ऐसा व्यक्ति गुरु के प्रभाव से अथाह ज्ञान और धन अर्जित करता है और हमेशा धार्मिक कार्यों में संलग्न रहता है।
फलित में शुक्र बुध मित्र है, ऐसे में शुक्र और बुध की युति से कलानिधि योग का निर्माण होता है और इस युति पर गुरु की दृष्टि आये तो यह उच्च कोटि का कलानिधि योग होता है, ऐसे व्यक्ति को कला की बहुत अच्छी समझ होती है, अच्छी कल्पना शक्ति के ये स्वामी होते है वही ऐसा जातक हमेशा रचनात्मक कार्यो से जुड़कर उसमे सफलता प्राप्त करता है।
इस योग से प्रभावित जातक मीडिया में और फिल्म में अच्छा कैरियर बनाते है, अगर इस योग में शुक्र बलवान हो तो ऐसा व्यक्ति टीवी और फिल्मो से अथाह धन प्राप्त करता है और काफी आलीशान जीवन व्यतीत करता है, इस योग में जो सबसे बड़ी चीज़ देखी जाती है वो यह है की ऐसे जातक की स्त्री मित्र अधिक होती है।
फलित में शनि को पाप ग्रह की संज्ञा दी गयी है जिसके कारण शनि और बुध की युति सामान्य तौर से शुभ फल देने वाली नहीं कही गयी है, शनि अक्सर बुध पर अपनी नकारात्मकता का असर देता है जिसके कारण ऐसा व्यक्ति बड़ा अकेला सा और उदास दिखाई देता है, अगर यह योग कमजोर है तो ऐसे में उसकी तरक्की में भी कही न कहीं बाधायें आती है और वो अक्सर नेगटिव बाते करता हुआ दिखाई देता है।
इस युति में अगर बुध शनि बलवान हो तो जातक हर चीज़ को बड़ी गहराई से समझने लगता है, शनि रहस्य का कारक है और यही कारण है की इस युति में शनि बलवान होते ही व्यक्ति को गूढ़ विषयों की अच्छी समझ हो जाती है, ऐसा व्यक्ति 32 वर्ष के बाद बहुत बड़ा उपदेशक भी होता है.
फलित में बुध तर्क है और राहु भ्रम है ऐसे में यह युति जातक को बहुत चालाक बना देती है, ऐसा व्यक्ति सफाई से झूठ बोलता है और किसी को उसकी योजना के बारे में भनक भी नहीं लगती, ऐसे व्यक्ति को दवाइयों का अच्छा ज्ञान होता है वही मीडिया में उसका कैरियर अच्छा बनता है।
इस युति में जो सबसे अलग बात है वो ये की ऐसा व्यक्ति खोजी किस्म का हो जाता है, वह नयी नयी जगह पर जाना और उनके बारे में लिखना पसंद करता है, अगर राहु कमजोर हो तो ऐसा व्यक्ति बस कल्पनाओं में ही जीता है और किसी को अपने आगे नहीं टिकने देता लेकिन अगर राहु बुध बलवान हो तो जातक अच्छा लेखक और रिसर्च करने वाला होता है।
फलित में केतु को आकस्मिक घटनाओं का कारक माना गया है वही केतु विच्छेद करवाने वाला ग्रह भी है और ऐसे में बुध केतु की युति के कारण जातक को अपने मित्रों से बिछोह सहना पड़ता है, व्यक्ति के मित्र नहीं होंगे वही अगर होंगे तो धोखा दे जायेंगे, बुध कमजोर होगा तो वाणी दोष होता है, ऐसे व्यक्ति में आत्मविश्वास नहीं होता है, केतु पीड़ित हो या कमजोर हो तो बार बार गिरना पड़ना, आकस्मिक दुर्घटना के योग बनते है।
इस युति में अगर बुध केतु बलवान हो तो जातक ज्ञानी और मंत्रो का ज्ञाता हो जाता है, उसे पराविद्याओं की समझ होती है, कई बार भविष्य में होने वाली घटनाओं का उसे पहले ही आभास हो जाता है वही ऐसा जातक इष्ट सिद्धि प्राप्त करने में सफल होता है और इसके अलावा इस युति की सबसे बड़ी खासियत यह है की केतु अगर बलवान हो तो जातक त्रिकाल दर्शी और प्रकांड ज्योतिषी होता है।