वैदिक ज्योतिष में हर ग्रह की अपनी ऊर्जा होती है और वो स्थान, राशि और नक्षत्र के अनुसार अपना फल करता है, एक ग्रह अपना फल किस प्रकार देगा ये कई फैक्टर्स पर निर्भर रहता है और उनमे से एक है अन्य ग्रहो के साथ युति, अब ये एक ग्रह के साथ भी हो सकती है और 2 ग्रह के साथ भी तो आज हम बात करने वाले है बृहस्पति ग्रह की अन्य ग्रहों के साथ युति का फल कैसा होगा !
फलित विचार में गुरु ज्ञानी है, बुद्ध किताब है लेकिन गुरु वेद है, शास्त्र है। ज्योतिष में ये माना गया है की जातक की कुंडली में बलवान सूर्य गुरु की युति हो जाये तो जातक परम् ज्ञानी हो, बहुत पढ़े और समाज का नाम रोशन करे. सूर्य आत्मा है और गुरु आचार्य तो ऐसा जातक धीर गंभीर होगा, राजा का सलाहकार होगा, जबरदस्त दूर दृष्टि होगी।
ज्योतिष में गुरु ज्ञान का कारक है, पंडित हैम मंदिर को दर्शाता है, वेद है पुराण है शास्त्र है। चंद्र गुरु की युति से गजकेसरी योग का निर्माण होता है, यह एक प्रकार का बेहतरीन राजयोग होता है जिससे जातक अत्यधिक बुद्धिमान, गंभीर और मंत्रो का ज्ञाता हो जाएगा। अगर स्त्री की कुंडली में यह योग है तो ऐसी स्त्री का पति बहुत धनी और गुणी होता है।
ऐसा व्यक्ति बहुत बढ़िया टीचर होगा, जिसका बृहस्पति अच्छा होता है वो नेचुरल टीचर होता है उसमे अगर चन्द्रमा का गुण आ जाए तो ऐसा जातक उच्च कोटि का वक्ता होता है, अगर वाणी भाव से सम्बन्ध बन जाए तो उस व्यक्ति के लाखो श्रोता होंगे।
ज्योतिष में बृहस्पति ज्ञान का कारक है, वेद शास्त्र, मंत्र इन सब का कारक बृहस्पति है और मंगल के साथ इनकी युति अच्छा परिणाम देने वाली मानी गयी है, इस युति के कारण जातक विद्वान होगा, धार्मिक होगा और शास्त्रों का अध्ययन करने वाला होगा, ऐसा व्यक्ति हमेशा साधुओं का आदर करता है और उनसे जुड़ाव महसूस करता है।
ऐसा जातक धर्म को आगे रखकर ही जीवन में कार्य करता है, अगर बलवान युति हो तो ऐसा व्यक्ति उच्च कोटि का साधक और ज्ञानी होगा, धर्म के साथ साथ उसे राजनीति की भी समझ होगी, धीर गंभीर और बड़ा अच्छा लीडर ऐसा व्यक्ति हो जाता है।
फलित में बुध और गुरु की युति को उत्तम माना गया है, बुध बुद्धि का कारक है और गुरु ज्ञान का तो ऐसे में जब इन दोनों ग्रहो की युति होती है तो जातक ज्ञानी और गुणी होता है, उसे कई गूढ़ विषयों की समझ होती है वही समाज में उसे काफी मान सम्मान प्राप्त होता है।
इस योग में अगर दोनों में से कोई भी एक ग्रह उच्च का हो जाये तो यह युति अत्यधिक बलवान हो जाती है और ऐसा व्यक्ति उच्च धार्मिक पद पर भी आसीन हो सकता है, ऐसा व्यक्ति गुरु के प्रभाव से अथाह ज्ञान और धन अर्जित करता है और हमेशा धार्मिक कार्यों में संलग्न रहता है।
जिन जातकों की कुंडली में गुरु और शुक्र की युति होती है ऐसे जातकों में ग़ज़ब का आकर्षण होता है, ऐसे लोग भौतिक सुख सुविधाओं में भी लिप्त होते है वही आध्यात्मिक भी होते है, क्यूंकि शुक्र भोग का कारक है तो गुरु ज्ञान का, ऐसे में ऐसे जातक दोनों का ही सुख प्राप्त करते है, ऐसा जातक देवताओं की उपासना भी करेगा, मंत्रो का ज्ञाता भी होगा और संसार के सुख भी आनंद के साथ भोग लेगा।
इस युति के बहुत शुभ परिणाम जीवन में प्राप्त होते हैं, शुक्र पत्नी का कारक होता है तो ऐसे में अगर इस युति में शुक्र बलवान हो तो जातक को बहुत ही प्रसन्नचित और गुणी पत्नी की प्राप्ति होती है। जातक अपने विवाह के बाद खूब तरक्की करता है और समाज में उसे खूब मान सम्मान प्राप्त होता है, अगर इस युति का संबंध नवें और पांचवे भाव से हो जाए तो जातक को मन्त्र सिद्धि प्राप्त होती है.
जिस जातक की कुंडली में शनि और गुरु की युति होती है वो जातक सांसारिक मोह माया से थोड़ा सा दूर होता है, ऐसा व्यक्ति धार्मिक होता है और उसे साधु संतो की संगत बेहद पसंद होती हैं, शनि को न्याय का कारक माना जाता है वही गुरु से उच्च पद का विचार किया जाता है तो ऐसे में शनि और गुरु की बलवान युति में जन्म जातक उच्च कोटि का साधक और न्यायधीश हो सकता है।
शनि से जनता का विचार किया जाता है तो ऐसे में ऐसा जातक जब राजनीति में आता है तो उसे जनता का अथाह समर्थन प्राप्त होता है, इस युति में अगर शनि बलवान हो तो ऐसे जातक की रहस्य में अधिक रूचि होती है और ऐसा जातक प्रकांड ज्योतिषी भी हो सकता है, आम तौर पर जितने भी बड़े धार्मिक गुरु, वक्ता और ज्योतिषी होते है उनकी कुंडली में आपको यह युति दिखाई देगी।
वैदिक ज्योतिष में गुरु और राहु की युति को गुरु चांडाल योग के नाम से जाना जाता है, इस युति में जातक का मन अस्थिर और धर्म से विमुख हो जाता है, राहु छल का कारक है, भ्रम का कारक है और ऐसे में इस युति में जन्मा जातक बहुत ही चालाक हो जाता है और वह छल से अपना काम निकालने लग जाता है।
इस युति में अगर गुरु बलवान हो यो ऐसा जातक राजनीति में सफल होता है लेकिन वाद विवाद से उसका नाता हमेशा रहता है, राहु और गुरु की युति पारिवारिक जीवन के लिए भी ठीक नहीं कही जा सकती है, ऐसे जातक के पुत्र आज्ञाकारी नहीं होते है वही परिवार में भी तनाव बना रहता है।
फलित में केतु को मोक्ष का कारक माना गया है और गुरु को ज्ञान का कारक माना गया है, ऐसे में जातक न्याय और धर्म का अधिकारी बनकर कार्य करता है, ऐसा जातक बचपन से ही मोक्ष की खोज में रहता है और बहुत आध्यात्मिक होता है, इस युति के प्रभाव से जातक को देव सिद्धि प्राप्त होती है और उसका तंत्र और मन्त्र में मन अधिक होता है।
इस युति के कारण जातक अत्यधिक भावुक भी होता हैं वही ऐसा जातक 42 वर्ष की आयु के बाद किसी धार्मिक संस्था का प्रमुख बनता है और उच्च कोटि का वक्ता होता है।