चाणक्य चन्द्रगुप्त मौर्य के महामंत्री थे। वे ‘कौटिल्य’ नाम से भी विख्यात हैं। वे तक्षशिला विश्वविद्यालय के आचार्य थे।
उन्होंने नंदवंश का नाश करके चन्द्रगुप्त मौर्य को राजा बनाया और उनके द्वारा लिखे गए ग्रन्थ को नीति शास्त्र का सबसे बड़ा ग्रन्थ माना जाता है।
एक मनुष्य के जीवन में धन लाभ और लक्ष्मी के बारे में भी उन्होंने कई बाते कहीं है तो आइये जानते है कि आचार्य के अनुसार लक्ष्मी कहा निवास करती है।
चाणक्य ने लिखा है कि जिस घर के सदस्यों में प्रेम रहता है। पति पत्नी के बीच मनमुटाव नहीं रहता है उस घर में लक्ष्मी का स्थायी निवास हो जाता है।
ऐसे लोगों पर लक्ष्मी की कृपा सदैव रहती है और धन का आगमन बना रहता है। इसके अलावा जिसकी भाषा कटु होती है जो सौंम्य नहीं है। जो बार बार दूसरों को अपमानित करता है उसे लक्ष्मी की कृपा नहीं मिलती।
आचार्य यह भी लिखते है कि जो धनी दान कर्म नहीं करता उसे भले ही कुछ समय के लिए लक्ष्मी प्राप्त हो जाए लेकिन कुछ समय के बाद वो उससे दूर हो जाती है।
इसलिए एक मनुष्य को हमेशा दान कर्म करना चाहिए।