भगवान परशुराम विष्णु के अवतार कहे जाते है और वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को पुनर्वसु नक्षत्र में माता रेणुका के गर्भ से उनका जन्म हुआ।
हर साल इसी दिन उनका जन्मोत्सव मनाया जाता है और इस माह 26 अप्रैल को परशुराम जयंती होगी और इसी दिन अक्षय तृतीया है।
तो आज हम आपको उनसे जुड़ा एक ऐसा रहस्य बताने वाले है जो शायद ही आपको पता होगा। क्या आप जानते है कि केरल राज्य में परशुराम की पूजा राज्य के जन्मदाता के रूप में की जाती है।
दरअसल भगवान परशुराम ने पिता के अपमान का बदला लेने के लिए 21 बार धरती को क्षत्रिय विहीन किया था।
उसके बाद भगवान विष्णु के एक और अवतार राम से जब उनका जनकपुरी में सीता के स्वयंवर में सामना हुआ तो उसके बाद उन्होंने अपना विचार बदला।
इसके बाद राम को वचन देकर वो सदा सदा के लिए महेंद्र पर्वत पर चले गए।
लेकिन परशुराम जी का जो फरसा था वो उनके साथ नहीं रह सकता था क्यूंकि वो तो क्रोधी थे। तो उन्होंने विचार करके उत्तर से दक्षिण दिशा के छोर के समुद्र में फरसा फेंका।
खून से सना फरसा देखकर समुद्र डर गया और पीछे हट गया।
समुद्र के पीछे हटने से जो जगह बनी, वो भूमि केरल के रूप में मानी जाती है और इसी मान्यता के आधार पर केरल में परशुराम की पूजा की जाती है।
उनका यह मत है कि भगवान् की स्वयं केरल पर कृपा है और यही कारण है की वहां कोई आपदा अधिक समय ठहर नहीं पाती।