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5 जून को पूर्णिमा के साथ होगा ज्येष्ठ माह का समापन, जाने इसका महत्व

By: RNI Hindi Desk 
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5 जून को पूर्णिमा के साथ होगा ज्येष्ठ माह का समापन, जाने इसका महत्व

हिन्दू पञ्चाङ्ग के अनुसार हर माह में दो पक्ष होते है जो चन्द्रमा की गति पर आधारित है। जब चन्द्रमा बिलकुल क्षीण होता है उसे अमावस्या वही जब वो पूर्ण बलवान होता है उसे पूर्णिमा कहा जाता है।

पूर्णिमा शुक्ल पक्ष की 14 तिथियों के बाद आती है वही अमावस्या कृष्ण पक्ष की 14 तिथियों के बाद आती है। किसी भी माह का आरंभ कृष्ण पक्ष से होता है और समापन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से होता है।

इसी क्रम में इस माह का समापन 5 जून को पूर्णिमा के साथ हो जाएगा। हिन्दू धर्म में इस तिथि का बड़ा महत्त्व है क्योंकि इस दिन चंद्रमा पूर्ण बलवान होता है।

इस दिन नदियों में स्नान और ध्यान की परंपरा है वहीं भगवान सत्यनारायण की कथा करने का विधान हिन्दू धर्म में माना गया है।

इस बार पूर्णिमा 5 जून को सुबह 3 बजे शुरू हो जायेगी। मतांतर से वट सावित्री का व्रत दक्षिण में इस दिन मनाया जाता है।

उत्तर भारत के कुछ राज्यों में इस व्रत को इस माह की अमावस्या के दिन मनाया जाता है वहीं दक्षिण के कुछ राज्यों में इसे पूर्णिमा को मनाया जाता है।

इस माह की पूर्णिमा तिथि इसलिए भी ख़ास है क्योंकि इसी दिन संत कबीर का जन्मदिन भी पड़ता है। उन्होंने समाज में फैली बुराइयों को दूर करने का काम किया था।

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