भोपाल। छिंदवाड़ा में Coldrif कफ सिरप से जुड़े बच्चों की मौत के मामले को लेकर मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राज्य सरकार और औषधि निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मामले में जिम्मेदारी तय करने, विभागीय जांच की स्थिति स्पष्ट करने और संबंधित अधिकारियों की भूमिका को लेकर सरकार से जवाब मांगा है। छिंदवाड़ा जिला प्रशासन के रिकॉर्ड के अनुसार अक्टूबर 2025 में Coldrif सिरप की बिक्री और वितरण पर रोक लगाने की एडवाइजरी जारी की गई थी।
जीतू पटवारी ने कहा कि छिंदवाड़ा के परासिया क्षेत्र में Coldrif कफ सिरप के सेवन के बाद कई बच्चों की तबीयत बिगड़ी और मौतें हुईं। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को स्वास्थ्य व्यवस्था और दवा निगरानी से जोड़ते हुए प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की मांग की। उपलब्ध रिपोर्टों में इस त्रासदी में 24 या उससे अधिक बच्चों की मौत का उल्लेख अलग-अलग समय पर किया गया है। एक चिकित्सा समीक्षा में सितंबर-अक्टूबर 2025 के दौरान मौतों की संख्या 21 से बढ़कर करीब 24 तक पहुंचने का उल्लेख है।
मामले की जांच में Coldrif के नमूनों में डायएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) पाए जाने की बात सामने आई थी। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के एक मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार एक नमूने में DEG की मात्रा 46.28 प्रतिशत बताई गई, जबकि अनुमत सीमा 0.1 प्रतिशत बताई गई थी। इसी मामले में हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में यह भी दर्ज है कि बच्चों में गंभीर किडनी संबंधी समस्या और मौतों को लेकर Coldrif के सेवन को जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया।
पटवारी ने सवाल उठाया कि यदि बाजार में मौजूद किसी दवा में गंभीर स्तर का विषाक्त पदार्थ पाया गया, तो उसे बाजार तक पहुंचने से रोकने वाली नियामक व्यवस्था की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने दवा के नमूने समय पर लिए जाने, उनकी जांच और बाजार में दवाओं की निगरानी से जुड़े तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए विस्तृत जांच की मांग की।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने एक औषधि निरीक्षक की विभागीय जांच के बीच बहाली और दूसरी जगह पदस्थापना को लेकर भी सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। उनका कहना है कि यदि किसी अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच लंबित थी, तो जांच पूरी होने से पहले बहाली के निर्णय का आधार सार्वजनिक किया जाना चाहिए। पटवारी ने सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा कि संबंधित अधिकारी के खिलाफ जांच किस स्थिति में है और बहाली का प्रशासनिक आधार क्या रहा।
पटवारी ने कहा कि मामले के बाद कुछ अधिकारियों के खिलाफ निलंबन और अन्य प्रशासनिक कार्रवाई की जानकारी सामने आई थी। ऐसे में अब सरकार को यह बताना चाहिए कि विभागीय जांच कहां तक पहुंची और किन अधिकारियों की अंतिम जिम्मेदारी तय की गई। इस बीच मामले में न्यायिक प्रक्रिया भी जारी है। सितंबर 2026 की एक रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने Coldrif मामले से जुड़े एक मेडिकल स्टॉकिस्ट को जमानत दी है, जबकि मामले में अन्य आरोपियों से जुड़ी कानूनी कार्यवाही जारी है।
पटवारी ने प्रदेश में कोडीन युक्त कफ सिरप के कथित अवैध कारोबार और वितरण नेटवर्क को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि जांच में बड़े स्तर पर फर्जी फर्मों और अवैध बिक्री की बात सामने आई है, तो दवा नियंत्रण व्यवस्था की निगरानी और प्रवर्तन क्षमता की समीक्षा जरूरी है। उन्होंने दवा निरीक्षकों के रिक्त पदों, प्रयोगशालाओं की क्षमता और आधुनिक परीक्षण सुविधाओं को लेकर भी सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
पटवारी ने सरकार से मुख्य रूप से यह जानना चाहा कि बच्चों की मौत के मामले में प्रशासनिक जवाबदेही किस स्तर पर तय हुई, संदिग्ध दवा की निगरानी में कहां चूक हुई, विभागीय जांचों की वर्तमान स्थिति क्या है और जांच लंबित रहते अधिकारी की बहाली का आधार क्या था। उन्होंने पीड़ित परिवारों के लिए पारदर्शी जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग दोहराई। मामले की अंतिम जिम्मेदारी और कानूनी दोष का निर्धारण संबंधित जांच व न्यायिक प्रक्रिया के निष्कर्षों पर निर्भर करेगा।