वर्तमान समय में कई लोग बढ़ते कर्ज की समस्या से परेशान रहते है और जब समय पर कर्ज नहीं चुका पाते है तो कई बार गलत कदम भी उठा लेते है। अगर ग्रहों के हिसाब से देखा जाए तो चौथा भाव जमीन का और छटा भाव कर्ज का कारक है। कर्ज का कारक ग्रह मंगल है।
जब कई बार मंगल किसी की कुंडली में पाप ग्रहों के मध्य आ जाता है या अशुभ भाव में बैठ जाता है तो ऐसा व्यक्ति हेमशा कर्ज से रहता है। अगर किसी से पैसे लेता है तो वो कभी चुका नहीं पाता है इसलिए यह समस्या मंगल के कारण गंभीर हो जाती है।
अगर आप अधिक कर्ज से परेशान है तो घर के मुख्य द्वार पर हरे रंग की गणेश जी की दो प्रतिमाएं लगानी चाहिए। दोनों प्रतिमाओं को इस तरह से लगाएं कि एक प्रतिमा का मुंह अंदर की ओर हो और दूसरी प्रतिमा का मुख बाहर की तरफ हो।
गणेश जी विघ्नहर्ता है और वो मनुष्यों के सभी कष्ट को हरण कर लते है। इसके अलावा हर मंगलवार को किसी हनुमान मंदिर में जाकर चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर हनुमान जी को अर्पित करें और बंजरंग बाण का पाठ करें।
हनुमान जी के मंदिर में जाकर नारियल का दान करें और उनके सामने बैठकर मंगल ऋणहर्ता स्तोत्र का पाठ करे। इससे आप जल्दी ही अपने कर्ज से मुक्त होने की और अग्रसर हो जाएंगे।