आज के ज़माने में कई बार ऐसा देखा जाता है की किसी की आमदनी तो हो रही है लेकिन उसकी बचत नहीं हो पाती है। आज के समय में आमदनी और बचत दोनों अलग अगल चीज़े है।
देखा जाए तो कई बार कम आमदनी वाला अच्छी बचत कर जाता है लेकिन जैसी अधिक आमदनी होती है वो कई बार बचत ही नहीं कर पाता है। ऐसे में कई बार होता यह है की कुछ वास्तु दोष के कारण यह दुःख मनुष्य के जीवन में आ जाता है।
इसके लिए कई बाते है जो एक इंसान को ध्यान में रखनी चाहिए। वास्तु के नियमानुसार, घर के उत्तर पूर्व यानी ईशान कोण में कूड़ादान या कचड़ा नहीं रखें। यहां गंदगी होने से धन का नाश होता रहता है।
नल की टोंटी से पानी नहीं टपकना चाहिए। क्योंकि यह आर्थिक नुकसान का बड़ा कारण माना जाता है। नल से पानी का टपकते रहना धीरे-धीरे धन के खर्च होने का संकेत होता है।
घर की उत्तर-पूर्व दिशा एकदम सपाट होनी चाहिए। वास्तु का नियम कहता है कि घर की ढलान अगर उत्तर पूर्व में ऊंची है तो धन के आगमन में रुकावट आती रहती है।
मकान का उत्तर पश्चिम का भाग ऊंचा होना चाहिए। क्योंकि वास्तु के नियमानुसार, जिस मकान का ढाल उत्तर पश्चिम में नीचा होता है तो उस घर में बरकत नहीं होती है।