चैत्र मास की पूर्णिमा पर श्री राम जी के भक्त हनुमान जी महाराज का जन्मदिन होता है। रामचरितमानस में हनुमान जी को रामचंद्र जी का परम भक्त कहा गया है। हनुमान जी को इस देश में बहुत पूजा जाता है। उन्हें पहलवान अपना आराध्य मानते है क्यूंकि बजरंगबली शक्ति और बुद्धि दोनों के दाता है।
इस बार हनुमान जयंती 8 अप्रैल को पड़ रही है, हनुमानजी का जन्म मंगलवार को हुआ था, इसी वजह से मंगलवार को हनुमानजी की पूजा का विशेष दिन माना जाता है। हनुमान जी अतुलित बल धाम है और इसका उदाहरण महाभारत काल की एक घटना से भी मिलता है। जैसा की हम सब जानते है, हनुमान जी अमर है और महाभारत काल में भी उनके होने का उल्लेख मिलता है।
जब पांडवों को वनवास मिला तो एक बार द्रोपदी को एक कमल दिखाई दिया। वो बहुत सुंदर था, द्रोपदी ने उसे लिया और भीम से ऐसा एक और कमल लाने की ज़िद की, भीम जब आगे चले तो पर्वत की चोटी पर केले के एक बगीचे में वो पहुंचे जहां हनुमान जी का निवास था।
हनुमान जी ने जब ये देखा तो उन्होंने विचार किया आगे जाना भीम के लिए ठीक नहीं तो वो मार्ग में लेट गए, भीम ने उनसे कहा, आप हट जाइये तो हनुमान जी ने कहा की मैं बीमार हूँ तो लेटा हुआ हूँ, तुम निकल जाओ। भीम ने हनुमान की पूंछ पकड़कर उन्हें हटाने की योजना बनायीं।
भीम हनुमान जी की पूंछ को हटाने गए और उसे जोरों से खींची, लेकिन हनुमान जी को तो कोई फर्क ही नहीं पड़ा। इसके बाद भीम ने बहुत कोशिश की लेकिन हनुमान जी टस से मस नहीं हुए। भीम को गलती का अहसास हुआ, उन्होंने मांफी मांगी और पूछा की आप कौन है ? जब उन्हें पता चला की ये तो स्वयं हनुमान है तो वो उनके चरणों में गिर पड़े।
हनुमान जी उनका सेवा भाव देखकर प्रसन्न हुए और उन्होंने भीम को वचन दिया की वो सदैव पांडवों का साथ देंगे। यही कारण था की युद्ध में अर्जुन के रथ पर स्वयं हनुमान जी विराजमान हुए।