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बालाघाट में वन भूमि पर बढ़ते अतिक्रमण से ग्रामीणों में नाराजगी, कार्रवाई की मांग तेज

बालाघाट के पूर्व बैहर वन परिक्षेत्र में सैकड़ों एकड़ वन भूमि पर अतिक्रमण और खेती किए जाने के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों ने वन विभाग की निष्क्रियता पर सवाल उठाते हुए उच्च अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार बढ़ते अतिक्रमण से वन क्षेत्र और पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है।

By: Nivedita 
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बालाघाट में वन भूमि पर बढ़ते अतिक्रमण से ग्रामीणों में नाराजगी, कार्रवाई की मांग तेज

बालाघाट जिले में वन भूमि पर बढ़ते अतिक्रमण को लेकर स्थानीय लोगों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े नागरिकों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। मामला वन परिक्षेत्र पूर्व बैहर के मंडई वृत्त की बीट क्षेत्र के कक्ष क्रमांक 1653-54 से जुड़ा है, जहां ग्रामीणों का आरोप है कि बड़ी मात्रा में वन भूमि पर कब्जा कर खेती की जा रही है। इसके लिए जंगल के पेड़ों की कटाई किए जाने की भी शिकायत सामने आई है।

विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि वन भूमि पर हो रहे अतिक्रमण की जानकारी संबंधित विभाग और प्रशासन को है, इसके बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। लगातार बढ़ रहे कब्जों के कारण विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी स्थिति से अवगत होने के बावजूद मूकदर्शक बने हुए हैं।

ग्रामीणों ने उच्च अधिकारियों को सौंपा ज्ञापन

मंडई वृत्त के ग्राम डोंगरिया निवासी भागचंद पटले सहित अन्य ग्रामीणों ने इस मामले को लेकर वन मंडलाधिकारी, मुख्यमंत्री, वन मंत्री और जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।

 

पर्यावरण संरक्षण को लेकर जताई चिंता

ग्रामीणों और वन प्रेमियों का कहना है कि वन क्षेत्र में लगातार हो रहे अतिक्रमण से पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित हो सकता है। उनका मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो जंगलों का दायरा लगातार घटता जाएगा, जिससे वन्यजीवों और प्राकृतिक संसाधनों पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा।

वन संरक्षण कानून के पालन की मांग

स्थानीय लोगों ने कहा कि वन संरक्षण से जुड़े कानूनों के अनुसार वन भूमि का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के लिए ही किया जा सकता है। बिना अनुमति वन भूमि पर कब्जा करना और उसका अन्य कार्यों में उपयोग करना नियमों के विरुद्ध है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने तथा वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की है।

 

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