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बोर्ड ऑफ पीस: न अमेरिका का हाथ थामा, न रूस-चीन के साथ गया भारत

डोनाल्ड ट्रंप के गाजा बोर्ड ऑफ पीस पर भारत ने ऑब्जर्वर बनकर हिस्सा लिया। रूस-चीन ने दूरी बनाई, भारत ने संतुलित विदेश नीति का संकेत दिया।

By: Abhinav Tiwari 
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बोर्ड ऑफ पीस: न अमेरिका का हाथ थामा, न रूस-चीन के साथ गया भारत

युद्ध से तबाह हो चुके गाजा में शांति और पुनर्निर्माण के प्रयासों के बीच भारत ने एक बार फिर स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति का परिचय दिया है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल पर गठित गाजा बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक 19 फरवरी को आयोजित हुई, लेकिन इस मंच पर भारत ने न तो खुलकर अमेरिका का साथ दिया और न ही रूस व चीन की तरह पूरी तरह दूरी बनाई।

बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक, भारत ऑब्जर्वर बना

अमेरिका द्वारा गाजा पट्टी के पुनर्विकास और शांति प्रयासों के लिए गठित बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक में भारत को पूर्ण सदस्य बनने का निमंत्रण भेजा गया था। हालांकि भारत ने फिलहाल इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। इसके बावजूद भारत ने ऑब्जर्वर (पर्यवेक्षक) के रूप में बैठक में हिस्सा लेकर संतुलन साधा। इस रुख को न समर्थन और न विरोध-बल्कि मामले को समझने और परखने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

रूस और चीन ने पूरी तरह बनाई दूरी

जहां भारत ने बीच का रास्ता चुना, वहीं दुनिया की दो बड़ी ताकतें रूस और चीन इस बोर्ड ऑफ पीस से पूरी तरह दूर रहीं। दोनों देशों ने न तो सदस्यता ली और न ही पहली बैठक में हिस्सा लिया। इसके बावजूद डोनाल्ड ट्रंप ने उम्मीद जताई कि भविष्य में रूस और चीन भी इस पहल से जुड़ सकते हैं।

किन देशों ने लिया हिस्सा?

अमेरिका ने इस बोर्ड ऑफ पीस के लिए 10 बिलियन अमेरिकी डॉलर देने की घोषणा की है। संगठन में कुल 27 सदस्य देश शामिल हैं, जिनमें- अर्जेंटीना, आर्मेनिया, अजरबैजान, हंगरी, पाकिस्तान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) शामिल हैं। 19 फरवरी की बैठक में करीब 50 देशों और यूरोपीय संघ ने अपने अधिकारी भेजे। जर्मनी, इटली, नॉर्वे, स्विट्जरलैंड और यूनाइटेड किंगडम समेत एक दर्जन से अधिक देशों ने सक्रिय भागीदारी की।

किन बड़े देशों ने नहीं लिया हिस्सा?

इस बैठक से कई अहम देश और संस्थाएं दूर रहीं-

  • फ्रांस

  • ब्रिटेन

  • रूस

  • चीन

  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रमुख सदस्य

भारत ने भी न तो पूर्ण समर्थन दिया और न ही पूरी तरह दूरी बनाई, बल्कि ऑब्जर्वर बनकर अपनी स्थिति स्पष्ट की।

दावोस कार्यक्रम से भी भारत रहा दूर

गौरतलब है कि भारत उन देशों में भी शामिल था, जिन्होंने 22 जनवरी को दावोस में आयोजित बोर्ड ऑफ पीस के उद्घाटन समारोह में भाग नहीं लिया था। यह संकेत देता है कि भारत इस पहल पर सोच-समझकर और चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ रहा है।

“चीन से अच्छे रिश्ते हैं”: ट्रंप

डोनाल्ड ट्रंप ने बैठक के दौरान कहा कि उनके शी जिनपिंग के साथ अच्छे संबंध हैं और उन्हें भरोसा है कि चीन भी भविष्य में बोर्ड ऑफ पीस से जुड़ेगा। उन्होंने कहा कि वे अप्रैल में चीन जाने वाले हैं और नया बोर्ड ऑफ पीस संयुक्त राष्ट्र की कार्यप्रणाली पर भी नजर रखेगा, ताकि अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं प्रभावी ढंग से काम करें।

क्या है बोर्ड ऑफ पीस का मकसद?

ट्रंप के अनुसार, बोर्ड ऑफ पीस का उद्देश्य-

  • अंतरराष्ट्रीय विवादों के समाधान के तरीके मजबूत करना

  • गाजा जैसे संकटग्रस्त क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना

  • वैश्विक शांति प्रयासों में नई संरचना तैयार करना

भारत का संदेश साफ

भारत का यह रुख साफ संकेत देता है कि वह किसी भी वैश्विक पहल में आंख मूंदकर शामिल नहीं होगा, बल्कि अपने राष्ट्रीय हित, क्षेत्रीय संतुलन और दीर्घकालिक कूटनीति को ध्यान में रखकर ही फैसला करेगा। गाजा बोर्ड ऑफ पीस के मामले में भी भारत ने यही संदेश दुनिया को दिया है।

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