मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश कृषि और कृषि आधारित उद्योगों के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार ने खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को उद्योग का दर्जा देने का निर्णय लिया है, जिससे इस क्षेत्र में निवेश को नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री रविवार को इंदौर में आयोजित Global Kabuli Chana Conclave को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश दलहन और तिलहन उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य है। चना विशेष रूप से भारतीय भोजन का अभिन्न हिस्सा है और शाकाहारी समाज के लिए यह पोषण का प्रमुख स्रोत है। उन्होंने कहा कि दाल उत्पादन और उपभोग के मामले में भारत विश्व में अग्रणी है और इस क्षमता को वैश्विक बाजार से जोड़ने के लिए खाद्य प्रसंस्करण अत्यंत आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने निवेशकों से आह्वान किया कि वे प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना के लिए आगे आएं। राज्य शासन भूमि, बिजली, पानी, करों में रियायत और नीतिगत सहयोग के माध्यम से हरसंभव सहायता प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि सरकार किसान, उद्योग और व्यापार-तीनों को साथ लेकर विकास का नया मॉडल तैयार कर रही है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राज्य सरकार ने किसानों और कृषि आधारित उद्योगों के लिए पांच वर्षीय रोडमैप तैयार किया है। इसके अंतर्गत- उद्योग स्थापना के नियमों का सरलीकरण, भूमि, बिजली और जल उपलब्धता में सहूलियत, करों में रियायत, श्रम आधारित उद्योगों के लिए प्रति श्रमिक 5,000 रुपये प्रतिमाह तक सहायता जैसे प्रावधान किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2003 के बाद प्रदेश में सिंचाई के रकबे में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इससे कृषि उत्पादन क्षमता बढ़ी है और किसानों की आय में निरंतर सुधार हो रहा है।
उन्होंने कहा कि अगले पांच वर्षों में राज्य का बजट दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे कृषि और औद्योगिक निवेश को और मजबूती मिलेगी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में किसानों के हित संरक्षण और कल्याण के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। वैश्विक स्तर पर भी किसानों के हितों को मजबूती से रखा जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योगपतियों और निवेशकों का सम्मान किया। कॉन्क्लेव में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, सांसद शंकर लालवानी, विधायक रमेश मेंदोला, गोलू शुक्ला, गौरव रणदीवे, सावन सोनकर, सुमित मिश्रा, जयपाल सिंह चावड़ा, श्रवण चावड़ा, संजय अग्रवाल सहित देश-विदेश से आए प्रतिनिधि और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को उद्योग का दर्जा देने का निर्णय मध्यप्रदेश को कृषि, निवेश और रोजगार के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाला साबित होगा। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि प्रदेश कृषि-आधारित औद्योगिक विकास का राष्ट्रीय मॉडल बनकर उभरेगा।