बड़वानी। शहर की कृषि उपज मंडी में इस सीजन सौंफ के भावों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। कम दाम मिलने से किसानों में मायूसी छाई हुई है। रविवार को मंडी में लगभग 144 क्विंटल सौंफ की आवक हुई। मंडी रिकॉर्ड के अनुसार सौंफ का भाव 6200 रुपये से लेकर 13,800 रुपये प्रति क्विंटल तक रहा। कम भाव के कारण दूर-दराज से आए किसानों के लिए लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है।
खरगोन जिले की झिरन्या तहसील से आए किसान सुनील निंगवाल ने बताया कि वे 2 से ढाई क्विंटल सौंफ लेकर मंडी पहुंचे हैं। उनके साथ 15 से 20 अन्य किसान भी अलग-अलग मात्रा में उपज लेकर आए हैं। किसान सुनील के अनुसार, पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष आधे से भी कम भाव मिल रहा है, पहले खुरवा सौंफ 17,000 से 18,000 रुपये प्रति क्विंटल बिकती थी, अच्छी गुणवत्ता की सौंफ को भी इस बार 15,000 से 16,000 रुपये में ही बेचना पड़ रहा है जबकि पहले यही भाव 22,000 से 23,000 रुपये तक मिलते थे। इस तरह के दामों से किसान संतुष्ट नहीं हैं और उनमें भारी नाराजगी देखी जा रही है।
किसानों का कहना है कि वे 100 से 150 किलोमीटर दूर से उपज लेकर बड़वानी मंडी पहुंचते हैं। प्रति क्विंटल 300 से 400 रुपये तक परिवहन खर्च आता है। 2 से 3 क्विंटल माल लाने पर एक किसान को 1000 से 1200 रुपये तक जेब से खर्च करना पड़ता है उचित दाम नहीं मिलने पर किसान मजबूरी में कम भाव पर ही माल बेच देते हैं, क्योंकि वापस ले जाना और भी महंगा पड़ता है।

दूर-दराज से आए किसानों ने मंडी प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। किसानों का कहना है कि:
मंडी परिसर में पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं
किसानों को खुले आसमान में रात बिताने को मजबूर होना पड़ता है
मंडी प्रशासन द्वारा उनकी सुध नहीं ली जा रही
धार जिले के टांडा क्षेत्र से आए किसान भारत ने बताया कि वे अपने चार साथियों के साथ शनिवार को बड़वानी मंडी पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि:
व्यापारियों द्वारा 120 से 130 रुपये प्रति किलो (क्विंटल अनुसार बेहद कम) के हिसाब से दाम लगाए जा रहे हैं
केवल भाड़े में ही 4500 रुपये खर्च हो गए
कम भाव के कारण वाहन किराया तक निकालना मुश्किल हो गया
किसानों ने मांग की है कि मंडी प्रशासन को क्वालिटी के अनुसार नीलामी कराकर उचित दाम दिलाना चाहिए।
मंडी व्यापारी राजेश राठौड़ ने बताया कि मौसम की मार और कम आवक के कारण फिलहाल सौंफ के दाम कमजोर हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024-25 में मसालों के निर्यात में 60 से 65 प्रतिशत की गिरावट आई है, निर्यात कमजोर होने से घरेलू बाजार पर दबाव पड़ा है, पिछले वर्ष जहां एक व्यापारी 12 से 13 टन की खरीदी करता था, वहीं इस वर्ष केवल 2 से 3 टन तक की ही खरीदी हो पा रही है। व्यापारियों का अनुमान है कि मौसम साफ होने और घरेलू बाजार में मांग बढ़ने पर आने वाले दिनों में दामों में सुधार देखने को मिल सकता है।