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आबकारी उपनिरीक्षक मुकेश पांडेय का दुर्लभ मुद्रा संग्रह बना आकर्षण का केंद्र

पन्ना के आबकारी उपनिरीक्षक मुकेश पांडेय का दुर्लभ मुद्रा संग्रह इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। उन्होंने मुगलकाल, ब्रिटिश काल और आजाद भारत के विभिन्न सिक्कों व नोटों को वर्षों से सहेज कर रखा है। खास बात यह है कि उनके संग्रह में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के हस्ताक्षर वाले एक और दो रुपये के दुर्लभ नोट भी शामिल हैं, जो संग्रह को और विशेष बनाते हैं।

By: BS Yadav 
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आबकारी उपनिरीक्षक मुकेश पांडेय का दुर्लभ मुद्रा संग्रह बना आकर्षण का केंद्र

पन्ना जिले के आबकारी उपनिरीक्षक मुकेश पांडेय का दुर्लभ मुद्रा संग्रह इन दिनों लोगों के बीच आकर्षण और चर्चा का विषय बना हुआ है। डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन लेन-देन के बढ़ते दौर में जहां पुरानी मुद्राएं धीरे-धीरे लोगों की स्मृतियों से ओझल होती जा रही हैं, वहीं मुकेश पांडेय ने भारत की ऐतिहासिक मुद्रा विरासत को वर्षों से सहेज कर रखा है। उनका यह संग्रह न केवल इतिहास प्रेमियों के लिए रोचक है, बल्कि नई पीढ़ी को देश की आर्थिक और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने का भी महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है।

मुकेश पांडेय के संग्रह में मुगलकाल, ब्रिटिश शासन और स्वतंत्र भारत के विभिन्न कालखंडों की मुद्राएं शामिल हैं। उनके पास मुगल बादशाह शाह आलम द्वितीय के शासनकाल का दुर्लभ रुपया सुरक्षित है, जो उस दौर की आर्थिक व्यवस्था और शिल्पकला की झलक प्रस्तुत करता है। इसके अलावा ओरछा रियासत का चांदी का रुपया भी उनके संग्रह की महत्वपूर्ण धरोहरों में शामिल है। ब्रिटिश कालीन तांबे और चांदी के सिक्कों के साथ-साथ पुराने समय में प्रचलित चवन्नी, अठन्नी और विभिन्न मूल्यवर्ग के सिक्के भी उन्होंने संरक्षित कर रखे हैं।

संग्रह की सबसे विशेष और दुर्लभ धरोहर पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के हस्ताक्षर वाले नोट हैं। मुकेश पांडेय के पास एक रुपये का ऐसा दुर्लभ नोट मौजूद है, जिस पर वित्त सचिव के रूप में डॉ. मनमोहन सिंह के हस्ताक्षर हैं। इसके अलावा दो रुपये का नोट भी संग्रह में सुरक्षित है, जिस पर उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर के रूप में हस्ताक्षर किए थे। ऐसे नोट आज बेहद दुर्लभ माने जाते हैं और मुद्रा संग्राहकों के बीच विशेष महत्व रखते हैं।

मुकेश पांडेय बताते हैं कि उन्हें बचपन से ही पुराने सिक्कों और नोटों को संग्रहित करने का शौक था। जब भी उन्हें खर्च के लिए पैसे मिलते थे और उनमें कोई पुराना या अलग तरह का सिक्का या नोट दिखाई देता था, तो वे उसे खर्च करने के बजाय संभालकर रख लेते थे। समय के साथ यही रुचि एक बड़े और व्यवस्थित संग्रह में बदल गई।

आज उनका यह संग्रह केवल व्यक्तिगत शौक तक सीमित नहीं है, बल्कि इतिहास, संस्कृति और मुद्रा विकास की कहानी भी बयां करता है। स्थानीय लोग और मुद्रा संग्रह में रुचि रखने वाले लोग उनके संग्रह को देखने पहुंचते हैं और इसकी सराहना करते हैं। पन्ना के आबकारी उपनिरीक्षक मुकेश पांडेय का यह प्रयास भारत की ऐतिहासिक मुद्रा विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण माना जा रहा है।

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