रिपोर्ट: सत्यम दुबे
नई दिल्ली: कोरोना के दूसरे लहर के कहर से देश में हाहाकार मचा हुआ है, मरीज बिना ऑक्सीजन और दवाइयों के अपनी जान गंवा रहे हैं। सरकारों के लिए सबसे बड़ी चुनौती कोरोना के चेन को तोड़ना हो गया है। देश में मचे हाहाकार के बीच वैक्सीन को सबसे बड़ा हथियार माना जा रहा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने भी 18 साल से ऊपरवालों को भी वैक्सीन लगाने की अनुमति दे दी है। लेकिन वैक्सीन के दाम को लेकर अभी भी हंगामा मचा हुआ है। प्राइवेट सेक्टर को 250 रुपये में दी जाने वाली वैक्सीन की कीमत छह गुना तक बढ़ गई है।
आपको बता दें कि देश में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) ने कोविशील्ड वैक्सीन की कीमत 700 से 900 रुपये वहीं भारत बायोटेक द्वारा बनाई गई कोवैक्सिन की कीमत 1250 से 1500 तक पहुंच चुकी है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट की मानें तो अभी निजी क्षेत्र के थोक टीकाकरण के चार बड़े कॉर्पोरेट अस्पताल ही सामने आए हैं, जिसमें अपोलो, मैक्स, फोर्टिस और मणिपाल हैं।
वेबसाइट ने आगे जानकारी दी कि दुनिया के ज्यादातर देशों में कोरोना वैक्सीन के दाम को लेकर एकरूपता नहीं है, भारत भी उन्हीं देशों में से एक है। कोरोना के बढ़ते मामलों के बाद भी देश का बड़ा हिस्सा कोविड टीकाकरण के लिए अपनी जेब से भुगतान नहीं करना चाहता है। इसका सबसे बड़ा कारण है भारत में प्राइवेट सेक्टर में बढ़ रही वैक्सीन की कीमत। भारत में कोविशिल्ड का एक शॉट पाने के लिए लगभग $12 और कोवाक्सिन के लिए $ 17 देना पड़ रहा है।
आपको बता दें कि भारत में जब वैक्सीन की शुरुआत हुई थी, उस वक्त केंद्र दो डोज के लिए 150 रुपये का ही भुगतान कर रहा था और राज्य सरकारों तथा निजी अस्पतालों को आपूर्ति कर रहा था। यही नहीं प्राइवेट अस्पताल में टीकाकरण के लिए प्रति खुराक 100 रुपये लेने की अनुमति दी गई थी। इस पर निजी अस्पतालों ने सहमति भी दे दी थी. हालांकि, कई अस्पताल प्रभावी रूप से टीकाकरण शुल्क के रूप में कोविशिल्ड के 250-300 रुपये प्रति डोज चार्ज कर रहे हैंय़
वहीं मैक्स अस्पताल के एक प्रवक्ता की मानें तो अभी तक कोविशील्ड की कीमत 660-670 रुपये थी, जिसमें GST और अन्य खर्चे शामिल थे। उन्होंने कहा कि जब वैक्सीन मंगाई जाती है तो उसमें 5 से 6 प्रतिशत तक खराब हो जाती है, ऐसे में उसकी कीमत 710 से 715 तक हो जाती है। इसके साथ ही जो कर्मचारी वैक्सीन लगाते हैं उनके लिए पीपी किट, सैनेटाइजर, बायोमेडिकल की व्यवस्था करनी पड़ती है, जिसके लिए 170 से 180 रुपये तक का खर्च आता है। ऐसे में एक वैक्सीन की लागत 900 रुपये तक हो जाती है।