मध्यप्रदेश में सड़क निर्माण को लेकर हुए विवाद पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कड़ा रुख अपनाया है। कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी को फटकार लगाते हुए उनके हालिया सड़क निरीक्षण पर सवाल खड़े किए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि जब संबंधित सड़क को पहले ही अमानक घोषित किया जा चुका था, तो फिर उसका निरीक्षण करने की जरूरत क्यों पड़ी।
“मंत्री रहते विपक्ष जैसा आचरण न करें”: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्री प्रतिमा बागरी के आचरण पर आपत्ति जताते हुए कहा कि मंत्री पद पर रहते हुए इस तरह का व्यवहार उचित नहीं है। उन्होंने सख्त हिदायत दी कि सरकार के भीतर रहते हुए विपक्ष जैसा आचरण न किया जाए और किसी भी विषय पर तथ्यात्मक जानकारी के साथ ही सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी जाए।
दरअसल, 21 दिसंबर को मंत्री प्रतिमा बागरी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें वे अपने विधानसभा क्षेत्र में सड़क निर्माण कार्य का निरीक्षण करती नजर आईं। वीडियो में मंत्री अपने पैरों से सड़क को दबाती दिखीं, जिससे डामर उखड़ता नजर आया। इसके बाद उन्होंने मौके पर मौजूद इंजीनियर को फटकार लगाई थी और ठेकेदार को हटाने की बात भी कही थी।
मंत्री ने यह भी कहा था कि वह इस मामले की शिकायत विभागीय मंत्री से करेंगी। हालांकि, बाद में सामने आया कि जिस कार्य को मंत्री ने नव-निर्माण समझकर निरीक्षण किया था, वह असल में डामर नवीनीकरण का कार्य था, जिसे लोक निर्माण विभाग (PWD) पहले ही अमानक मानकर खारिज कर चुका था।
जानकारी के अनुसार, गुणवत्ताहीन कार्य की शिकायत सामने आने के बाद 15 दिसंबर 2025 को लोक निर्माण विभाग उपसंभाग मझगवां के अनुविभागीय अधिकारी ने उपयंत्री सुरेंद्र सिंह के साथ स्थल निरीक्षण किया था। जांच में किमी 3/10 से 3/4 तक का कार्य अमानक पाया गया था।
इसके बाद ठेकेदार को मानक स्तर का कार्य दोबारा कराने के निर्देश दिए गए थे और 19 दिसंबर को कार्यपालन यंत्री (ईई) द्वारा उक्त कार्य को औपचारिक रूप से निरस्त कर दिया गया था।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद सरकार के भीतर ही समन्वय और प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। मुख्यमंत्री की फटकार को यह संकेत माना जा रहा है कि सरकार अब इस तरह के मामलों में स्पष्टता, समन्वय और अनुशासन पर विशेष जोर देगी, ताकि सार्वजनिक मंचों पर भ्रम और अनावश्यक विवाद की स्थिति न बने।
15 दिसंबर को ही PWD ले चुका था एक्शन
