हमारी संस्कृति में मेहमान को भगवान का दर्जा दिया जाता है, इसलिए यह बहुत जरुरी है की जो भी मेहमान आपके घर में आये वो आपसे खुश रहे वहीं उसके आपके साथ संबंध जाने के बाद भी अच्छे रहे तो ऐसे में यह जानना बहुत जरुरी है की आपके अतिथि गृह का वास्तु कैसा है।
ज्योतिष के नौ ग्रहों में चन्द्रमा सबसे तेजी से गति करने वाला ग्रह है और चन्द्रमा की दिशा उत्तर-पश्चिम यानी वाव्यव कोण मानी गयी है। इस दिशा के स्वामी वायु देव है। माना जाता है की वाव्यव कोण में ही मेहमान का कमरा होना चाहिए।

जैसे चन्द्रमा सबसे तेज गति से चलता हुआ नक्षत्र और राशियों पर अधिक समय नहीं टिकता ठीक वैसे ही इस कोण में मेहमान का कमरा होने से वो अधिक समय तक नहीं रुकता है और प्रॉपर मान सम्मान के साथ वापिस जाता है।
शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य, संपत्ति व माता का कारक भी इसी दिशा को माना गया है। मेहमान के कमरे का दरवाज़ा पूर्व दिशा में होना चाहिए। वही ईशान कोण में एक खिड़की जरूर होनी चाहिए। इससे मेहमान कभी भी नकारात्मक महसूस नहीं करता।